वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी. इस दौरे का फोकस भारत के कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने, निवेश के नए मौके तलाशने और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर रहेगा. कारोबार और निवेश से जुड़े लोगों के लिए यह दौरा इसलिए अहम है, क्योंकि बातचीत में ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन जैसे सेक्टर प्रमुखता से शामिल रहेंगे.
कनाडा में किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
दौरे के पहले हिस्से में वित्त मंत्री टोरंटो जाएंगी. यहां वह कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन के साथ पहली इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग में हिस्सा लेंगी. दोनों देशों के बीच आर्थिक हालात, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग और निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी. भारत-कनाडा के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) की दिशा में चल रही कोशिशों पर भी बातचीत होगी. इसके अलावा ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और मजबूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने पर जोर रहेगा.
निवेशकों और कंपनियों के लिए क्या खास है?
टोरंटो में सीतारमण निवेश से जुड़े एक राउंडटेबल में हिस्सा लेंगी. इसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. इसका मकसद दोनों देशों के कारोबारियों के बीच निवेश के रास्ते तलाशना है. वह भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बिजनेस राउंडटेबल में भी शामिल होंगी. यहां GIFT City-IFSC में वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कारोबार और निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी. इसके अलावा कॉरपोरेट कंपनियों के साथ वन-टू-वन बैठकें होंगी और भारतीय समुदाय से भी बातचीत की जाएगी. यानी दौरे में सरकारी बातचीत के साथ सीधे कारोबारी संपर्क पर भी जोर रहेगा.
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अमेरिका में कहां-कहां जाएंगी वित्त मंत्री?
अमेरिका में सीतारमण का दौरा 28 अगस्त से 2 सितंबर तक चलेगा. वह शिकागो, एशविल और न्यूयॉर्क जाएंगी. शिकागो में निवेशकों और कॉरपोरेट लीडर्स के साथ बैठक होगी. वह यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के पोल्स्की सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन का दौरा भी करेंगी. 31 अगस्त से 1 सितंबर तक एशविल में G20 फाइनेंस मिनिस्टर्स एंड सेंट्रल बैंक गवर्नर्स (FMCBG) मीटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. यह बैठक अमेरिका की G20 अध्यक्षता में हो रही है. यहां वैश्विक आर्थिक ग्रोथ, वित्तीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
भारतीय कारोबार और आम लोगों के लिए क्यों अहम है दौरा?
इस दौरे का सीधा फायदा तुरंत किसी एक फैसले के रूप में दिखे, यह जरूरी नहीं है. लेकिन ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत-कनाडा और भारत-अमेरिका सहयोग बढ़ता है, तो इसका असर आगे चलकर कंपनियों के कारोबार और निवेश के माहौल पर पड़ सकता है. दौरे के आखिर में न्यूयॉर्क में निवेशकों के साथ बैठकें होंगी. सीतारमण NASDAQ में बेल-रिंगिंग समारोह में भी शामिल होंगी और वित्तीय बाजार से जुड़े प्लेटफॉर्म के विकास को समझेंगी.
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