E20 Fuel Insurance Claim: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से ऐसे कई दावे किए जा रहे हैं कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर बीमा कंपनी क्लेम देने से मना कर सकती है. लेकिन क्या सच में ऐसा है? सरकार, इंश्योरेंस कंपनियों और बड़ी ऑटो कंपनियों ने इस पर साफ जवाब दिया है.
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने साफ किया है कि सिर्फ E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने की वजह से न आपकी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी खत्म होती है और न ही क्लेम अपने आप रिजेक्ट किया जा सकता है. बीमा कंपनी हर मामले की अलग-अलग जांच करती है और फैसला नुकसान की असली वजह के आधार पर लिया जाता है.
क्या सिर्फ E20 पेट्रोल से इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा?
नहीं, लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस के प्रेसिडेंट (क्लेम्स, ऑपरेशंस एंड कस्टमर सर्विस) सचिन जोशी के मुताबिक, सिर्फ E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के आधार पर कोई भी बीमा कंपनी क्लेम खारिज नहीं कर सकती. उन्होंने बताया कि अगर किसी गाड़ी को नुकसान होता है तो इंश्योरेंस कंपनी यह देखती है कि नुकसान की वजह क्या थी, पॉलिसी में क्या शर्तें हैं, कौन-कौन सी चीजें कवर हैं और सर्वे रिपोर्ट क्या कहती है. अगर आपकी गाड़ी E20 के लिए बनी नहीं है, तब भी सिर्फ इसी आधार पर क्लेम रिजेक्ट नहीं किया जा सकता. पहले यह साबित करना होगा कि नुकसान सीधे E20 की वजह से हुआ है और वह पॉलिसी की शर्तों के तहत कवर नहीं है.
क्लेम तय करते समय किन बातों की जांच होती है?
| क्या देखा जाता है? | क्यों जरूरी है? |
| नुकसान की असली वजह | गाड़ी किस कारण खराब हुई |
| पॉलिसी की शर्तें | नुकसान कवर है या नहीं |
| एक्सक्लूजन | कौन-सी स्थितियों में क्लेम नहीं मिलेगा |
| सर्वे रिपोर्ट | जांच के बाद सामने आए तथ्य |
बीमा एक्स्पर्ट्स का भी कहना है कि हर क्लेम को अलग-अलग देखा जाता है. जब तक यह साफ तौर पर साबित न हो जाए कि नुकसान गलत फ्यूल की वजह से हुआ है और वह पॉलिसी के एक्सक्लूजन में आता है, तब तक केवल E20 पेट्रोल क्लेम रिजेक्ट करने की वजह नहीं बन सकता.
पुरानी गाड़ी वालों को क्या करना चाहिए?
अगर आपकी कार काफी पुरानी है तो घबराने की जरूरत नहीं है. लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस में प्रेसिडेंट (क्लेम्स, ऑपरेशंस एंड कस्टमर सर्विस) सचिन जोशी के मुताबिक, बहुत पुराने गाड़ियों में समय के साथ थोड़ी सामान्य घिसावट हो सकती है, लेकिन इसे नियमित सर्विसिंग में ठीक किया जा सकता है. सरकार और ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट भी मानते हैं कि E20 ज्यादातर गाड़ी मालिकों के लिए सुरक्षित बदलाव है. पुरानी गाड़ियों के मालिकों को सिर्फ इतना ध्यान रखना चाहिए कि सर्विस के दौरान सील और गैस्केट की जांच जरूर कराएं. इसके अलावा समय पर मेंटेनेंस करवाते रहें. उन्होंने यह भी बताया कि एथेनॉल मिला फ्यूल बेहतर दहन (Combustion) में मदद करता है और कार्बन उत्सर्जन (Emission) कम करने में भी सहायक होता है.
क्या E20 से वारंटी खत्म हो सकती है?
यहां एक बात समझना जरूरी है कि इंश्योरेंस और कंपनी की वारंटी दोनों अलग-अलग चीजें हैं. E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस क्लेम पर अपने आप असर नहीं पड़ता, लेकिन वारंटी का फैसला गाड़ी के निर्माता की शर्तों के अनुसार हो सकता है. अगर आपकी कार के ओनर मैनुअल में साफ लिखा है कि गाड़ी E20 के लिए उपयुक्त नहीं है और लंबे समय तक ऐसे फ्यूल के इस्तेमाल से नुकसान होता है, तो कंपनी वारंटी क्लेम देने से इनकार कर सकती है. इसलिए हमेशा ओनर मैनुअल में दी गई सलाह के मुताबिक ही फ्यूल का इस्तेमाल करें.
सरकार और कार कंपनियों ने क्या कहा?
मारुति सुजुकी और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर का कहना है कि उन्हें अब तक E20 पेट्रोल की वजह से इंश्योरेंस क्लेम बढ़ने का कोई मामला नहीं मिला है. कंपनियों के टेस्ट और सर्विस डेटा में भी इंजन की असामान्य घिसावट, जंग या फ्यूल सिस्टम को E20 से होने वाला कोई बड़ा नुकसान नहीं मिला. टोयोटा का कहना है कि कई मामलों में दिक्कत की वजह एथेनॉल नहीं, बल्कि दूषित (Contaminated) फ्यूल होता है.
साथ ही कंपनियों और एक्स्पर्ट्स ने गाड़ी मालिकों के लिए कुछ जरूरी सलाह भी दी है. जैसे:
- सामान्य मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में सड़क दुर्घटना, चोरी, आग, बाढ़ और थर्ड पार्टी नुकसान जैसे मामले कवर होते हैं.
- सामान्य घिसावट, मैकेनिकल खराबी, इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और उसके बाद होने वाला नुकसान आमतौर पर कवर नहीं होता, जब तक अलग से ऐड-ऑन कवर न लिया गया हो.
- अगर फ्यूल से जुड़ी कोई समस्या आए, तो पेट्रोल खरीदने की रसीद, सर्विस सेंटर का जॉब कार्ड, डायग्नोस्टिक रिपोर्ट और फोटो संभालकर रखें.
- ऐसे मामले में तुरंत अपनी बीमा कंपनी और अधिकृत सर्विस सेंटर को जानकारी दें, ताकि जांच में आसानी हो.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा है कि E20-कंपैटिबल वाहनों के इंजन को E20 से नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है. वहीं ARAI की स्टडी में भी ऐसे वाहनों की परफॉर्मेंस और इंजन की टिकाऊपन पर कोई बड़ा असर नहीं पाया गया.
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