त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले आम लोगों की जेब पर एक और दबाव बढ़ सकता है. देश की कई बड़ी कंज्यूमर कंपनियां आने वाले महीनों में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे माल और फ्यूल की बढ़ती लागत है. कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से बढ़ रही लागत की वजह से अब कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है. इसका असर टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, नमक, चाय, पेंट, टायर और दूसरे रोजमर्रा के सामान पर देखने को मिल सकता है.
किन कंपनियों ने बढ़ाए या बढ़ाने के दिए संकेत?
कई कंपनियों ने अपनी तिमाही नतीजों के दौरान कीमतें बढ़ाने की जानकारी दी है.
| कंपनी | अब तक की बढ़ोतरी | आगे का प्लान |
| एशियन पेंट्स | करीब 7% दाम बढ़ाए | दूसरी तिमाही से 8-9% तक प्राइस ग्रोथ की उम्मीद |
| हिंदुस्तान यूनिलीवर | औसतन 5% बढ़ोतरी | होम केयर समेत कई प्रोडक्ट्स में और बढ़ोतरी संभव |
| टाटा कंज्यूमर | नमक में करीब 7% बढ़ोतरी, चाय भी महंगी | लागत बढ़ी तो और कीमतें बढ़ सकती हैं |
| डाबर इंडिया | करीब 4% बढ़ोतरी | जरूरत पड़ने पर दूसरी बार भी दाम बढ़ाए जा सकते हैं |
| सीट | जून में मजबूत प्राइस हाइक | जुलाई-अगस्त तक बढ़ोतरी जारी रखने की योजना |
इसके अलावा डोडला डेयरी और हैवेल्स जैसी कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ाने की बात कही है. हैवेल्स ने कुछ प्रोडक्ट्स के दाम 8% तक बढ़ा दिए हैं.
आखिर दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव की वजह से कच्चे तेल और उससे जुड़े कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. इससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ गई है. हिंदुस्तान यूनिलीवर के मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने कहा कि क्रूड से जुड़े इनपुट महंगे होने के कारण कंपनी अलग-अलग कैटेगरी में संतुलित तरीके से कीमतें बढ़ा रही है.
ग्राहकों पर कितना असर पड़ सकता है?
अगस्त से नवंबर तक का समय कंपनियों के लिए सबसे अहम बिक्री सीजन माना जाता है. खासकर दिवाली के दौरान कई कंपनियों की सालाना बिक्री का बड़ा हिस्सा आता है. ऐसे में कंपनियों को उम्मीद है कि मजबूत मांग के बीच बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकेगा. हालांकि अब यह भी देखने वाली बात होगी कि कीमतें बढ़ने के बाद खरीदारी पर कितना असर पड़ता है.
महंगाई और RBI की नजर किस पर है?
जून में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) करीब डेढ़ साल बाद पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई. हालांकि यह अभी भी RBI के 2% से 6% के दायरे में है. केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि मार्च 2027 तक खत्म होने वाले वित्त वर्ष में औसत महंगाई 5.1% रह सकती है.
वित्त मंत्रालय ने भी चेतावनी दी है कि अब महंगाई सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं है. वैश्विक ईंधन कीमतें और मौसम से जुड़ी चुनौतियां दूसरे कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कीमतों पर भी असर डाल रही हैं.
फिलहाल कंपनियों का कहना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में मांग बनी हुई है. जून में रिटेल बिक्री भी पिछले साल के मुकाबले 6% बढ़ी. लेकिन अगर आने वाले महीनों में मानसून उम्मीद से कमजोर रहता है और लागत ऊंची बनी रहती है, तो आम लोगों को रोजमर्रा के खर्च में और बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है.
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