Farming Idea: नेपियर घास की खेती, एक बार लगाएं,पांच साल तक करें बंपर कमाई

Farming Idea: नेपियर घास, जिसे हाथी घास भी कहा जाता है. पशुपालन के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है

Farming Idea: नेपियर घास, जिसे हाथी घास भी कहा जाता है. पशुपालन के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है. यह घास दुधारू पशुओं के लिए अत्यधिक पौष्टिक मानी जाती है और इसके सेवन से दूध उत्पादन में इजाफा होता है. पशुओं की सेहत को बेहतर बनाए रखने में भी यह घास उपयोगी है.

कम निवेश में बड़ा मुनाफा

यदि आप कम लागत में मोटी कमाई का तरीका खोज रहे हैं, तो नेपियर घास की खेती एक शानदार विकल्प हो सकता है. यह घास गन्ने जैसी दिखती है और मूल रूप से थाईलैंड में पाई जाती है. नेपियर घास को एक बार बुवाई करने के बाद पांच साल तक काटा जा सकता है, जिससे यह किसानों और पशुपालकों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक बनती है.

नेपियर घास से नए उपयोग: CNG और कोयला उत्पादन

नेपियर घास से CNG और कोयला बनाने की तकनीकों पर भी काम हो रहा है. यह नवाचार किसानों को कम लागत में अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करता है. इस घास को बोने के लिए बीज की आवश्यकता नहीं होती. इसके बजाय, डंठल का उपयोग किया जाता है, जिन्हें नेपियर स्टिक कहा जाता है. एक बीघा खेत में लगभग 4000 डंठल लगते हैं. इसकी खेती सर्दी, गर्मी, और वर्षा ऋतु में की जा सकती है.

नेपियर घास की खेती से चारे की कमी का एक ऑप्शन होता है. किसान इसके डंठल बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. कई राज्यों में इसकी खेती के लिए सब्सिडी भी उपलब्ध है.

क्या है नेपियर घास की खासियत?

नेपियर घास एक हाईब्रिड वैरायटी है जो बंजर भूमि और खेतों की मेड़ों पर भी उगाई जा सकती है. इसकी खासियत है कि यह केवल पानी के सहारे 20-25 दिनों में तैयार हो जाती है. एक एकड़ से लगभग 300-400 क्विंटल घास का उत्पादन होता है. कटाई के बाद इसकी शाखाएं स्वतः फिर से उगने लगती हैं.

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By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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