F&O Trading New Rules: अगर आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं, तो 1 अप्रैल 2026 से आपके लिए नियम पूरी तरह बदलने वाले हैं. सरकार और सेबी (SEBI) ने मिलकर ऐसे कदम उठाए हैं जिससे छोटे इन्वेस्टर्स के नुकसान को कम किया जा सके और बाजार में होने वाली अंधाधुंध सट्टेबाजी पर लगाम लगाई जा सके.
F&O ट्रेडिंग कितनी महंगी हो जाएगी?
सबसे बड़ा झटका फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडर्स को लगा है. सरकार ने Securities Transaction Tax (STT) बढ़ा दिया है.
- फ्यूचर्स (Futures): टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया है. यानी अब आपको पहले के मुकाबले करीब 150% ज्यादा टैक्स देना होगा.
- ऑप्शंस (Options): प्रीमियम पर टैक्स 0.10% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है.
इसका सीधा असर आपके ‘मुनाफे’ पर पड़ेगा. पहले निफ्टी फ्यूचर्स में ट्रेड को बराबर (breakeven) करने के लिए करीब 6 पॉइंट्स की बढ़त जरूरी थी, जो अब बढ़कर 13 पॉइंट्स हो जाएगी.
क्या अब कैश का इंतजाम ज्यादा करना पड़ेगा?
जी हां, अब उधार के भरोसे ट्रेडिंग करना मुश्किल होगा. सेबी के 50:50 मार्जिन नियम के अनुसार, अब आपको अपनी ट्रेडिंग पोजीशन का कम से कम 50% हिस्सा कैश में रखना होगा. बाकी 50% के लिए आप शेयर गिरवी रख सकते हैं. पहले लोग शेयर गिरवी रखकर ज्यादा ट्रेड कर लेते थे, लेकिन अब जेब में नगद पैसा होना जरूरी है. साथ ही, अब बैंक ब्रोकरों को मनमाना फंड नहीं दे पाएंगे, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी कम हो सकती है.
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एल्गो ट्रेडिंग और ऐप्स पर क्या नई पाबंदियां हैं?
अगर आप कंप्यूटर प्रोग्राम या ‘एल्गो’ (Algo) के जरिए ट्रेड करते हैं, तो अब नियम सख्त हैं:
- हर एल्गो स्ट्रेटेजी को एक्सचेंज से मंजूर कराना होगा.
- रिटेलर्स को अपना IP एड्रेस ब्रोकर के पास रजिस्टर करना होगा.
- बिना मंजूरी वाले ऐप्स या सॉफ्टवेयर से ट्रेडिंग अब संभव नहीं होगी. इससे बाजार में ट्रांसपेरेंसी आएगी और धोखाधड़ी के चांस कम होंगे.
म्यूचुअल फंड और बायबैक पर क्या बदला?
- बायबैक (Buyback): अगर कंपनी आपसे अपने शेयर वापस खरीदती है, तो होने वाले मुनाफे पर अब सीधा 12% सरचार्ज लगेगा. इससे शेयरधारकों का टैक्स खर्च बढ़ जाएगा.
- म्यूचुअल फंड: अब फंड हाउस को अपनी फीस और बाकी खर्चे (जैसे ब्रोकरेज, टैक्स) अलग-अलग दिखाने होंगे. इससे निवेशकों को पता चलेगा कि उनका पैसा कहां-कहां कट रहा है.
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