STT Tax: 1 अप्रैल 2026 से शेयर बाजार के F&O (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) सेगमेंट में ट्रेडिंग करना पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा. सरकार और RBI ने मिलकर कुछ नए नियम लागू किए हैं, जिनका मकसद बाजार में ज्यादा सट्टेबाजी को रोकना और सिस्टम को सुरक्षित रखना है. इन बदलावों का असर खासकर छोटे निवेशकों और उन ट्रेडर्स पर पड़ेगा, जो कम पैसे में ज्यादा ट्रेडिंग करते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम 20% से 30% तक घट सकता है. फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर जानने के लिए यहां क्लिक करें
STT में भारी बढ़ोतरी
सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर लगने वाले STT (टैक्स) को काफी बढ़ा दिया है. अब फ्यूचर्स पर टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया है, यानी करीब 150% की बढ़ोतरी. वहीं, ऑप्शंस पर भी प्रीमियम और एक्सरसाइज दोनों पर टैक्स बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है. इसका सीधा मतलब है कि हर ट्रेड पर आपको पहले से ज्यादा पैसा देना होगा, चाहे आपको फायदा हो या नुकसान. क्योंकि यह टैक्स ट्रेड के समय ही कट जाता है, इसलिए यह ट्रेडर्स के लिए एक तय खर्च बन जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे खासकर फ्यूचर्स में ट्रेडिंग कम हो सकती है. STT का अर्थ समझने के लिए यहां क्लिक करें
कर्ज देने के नियम में बदलाव
टैक्स के साथ-साथ RBI ने कर्ज देने के नियम भी सख्त कर दिए हैं. अब ब्रोकर्स को हर क्रेडिट और बैंक गारंटी के लिए 100% कोलैटरल रखना होगा. यानी जितना पैसा उधार लिया जाएगा, उतनी पूरी गारंटी देनी होगी. पहले ट्रेडर्स और ब्रोकर्स कम पैसे में ज्यादा ट्रेडिंग कर लेते थे, जिसे लेवरेज कहते हैं. लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा. खासकर बड़े ट्रेडर्स, जो बैंक गारंटी के सहारे ज्यादा जोखिम लेते थे, उन्हें अब पूरा कैश मार्जिन रखना पड़ेगा.
छोटे निवेशकों पर पड़ेगा असर
इन बदलावों का सबसे ज्यादा असर छोटे और रिटेल निवेशकों पर पड़ेगा. ज्यादा टैक्स और सख्त नियमों के कारण ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी, जिससे छोटे निवेशकों के लिए बाजार में टिकना मुश्किल हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटेल ट्रेडिंग वॉल्यूम में करीब 20% तक की गिरावट आ सकती है. जब बाजार में ट्रेडिंग कम होगी, तो लिक्विडिटी भी घटेगी. इसका असर यह होगा कि शेयर खरीदना और बेचना पहले से ज्यादा महंगा और मुश्किल हो सकता है.
नए टैक्स और नियमों
| सेगमेंट | पुराना STT रेट | नया STT रेट (1 अप्रैल से) | प्रभाव |
| फ्यूचर्स (Futures) | 0.02% | 0.05% | 150% की वृद्धि |
| ऑप्शंस (Options) | 0.10% / 0.125% | 0.15% | लागत में भारी बढ़ोतरी |
| बैंक गारंटी / लोन | कम कोलैटरल संभव | 100% कोलैटरल अनिवार्य | लेवरेज (Leverage) कम होगी |
क्यों उठाए गए ये कदम ?
सरकार और RBI का कहना है कि इन नियमों का मकसद बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी को रोकना और सिस्टम को सुरक्षित रखना है. कई बार बड़े ट्रेडर्स उधार लेकर बहुत ज्यादा जोखिम लेते हैं, जिससे बाजार में खतरा बढ़ जाता है. नए नियमों से इस तरह के लेवरेज को कम किया जाएगा, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में बैंकिंग सिस्टम पर असर कम पड़े. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी और आम निवेशकों के लिए बाजार में काम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
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