अचार के सीजन से सरसों और बिनौला तेल में सुधार, रुपया मजबूत होने से सोयाबीन और पाम ऑयल टूटे

Edible Oil Market Weekly Report : तेल-तिलहन बाजार का साप्ताहिक हाल: अचार के सीजन की मांग से चमकी सरसों और बिनौला, तो डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से सोयाबीन और पाम ऑयल की कीमतों में आई गिरावट. जानिए नया रेट कार्ड.

Edible Oil Market Weekly Report : बीते सप्ताह (मई 2026 के आखिरी हफ्ते) देश के तेल-तिलहन बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला. एक तरफ जहां मंडियों में कम आवक और आगामी बरसात के मद्देनजर अचार बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ने से सरसों और बिनौला (कॉटनसीड) तेल की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया.

वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूती के चलते सोयाबीन, पाम और पामोलीन तेल के दाम गिरावट के साथ बंद हुए. आइए विस्तार से समझते हैं तेल-तिलहन बाजार में आए इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजहें और विभिन्न तेलों के ताजा भाव.

सरसों और बिनौला तेल में सुधार की वजह

बाजार के जानकारों के मुताबिक, जल्द ही देश में बरसात का मौसम शुरू होने वाला है, जिसे देखते हुए अचार बनाने वाली कंपनियों ने सरसों तेल की खरीदारी बढ़ा दी है. मंडियों में सरसों की आवक फिलहाल कमजोर है, जिससे कम उपलब्धता के कारण इसके दाम मामूली मजबूत हुए हैं.

कपास (नरमा) की आवक घटने से बाजार में बिनौला तेल की उपलब्धता कम हुई है, जबकि मांग मजबूत है. इसी किल्लत को देखते हुए सरकार ने कपड़ा मिलों को राहत देने के लिए कपास पर लगने वाले 10% आयात शुल्क को घटाकर शून्य (फ्री) कर दिया है.

क्यों गिरे सोयाबीन और पाम ऑयल के दाम?

इस हफ्ते डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में शानदार रिकवरी देखी गई है. रुपया मजबूत होने से विदेशों से खाद्य तेलों का आयात (Import) सस्ता हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा और सोयाबीन व पाम ऑयल के दाम टूट गए. सरकार ने कच्चे पाम तेल (CPO) के आयात शुल्क मूल्य में ₹21 प्रति क्विंटल और पामोलीन में ₹48 प्रति क्विंटल की वृद्धि की है, जबकि सोयाबीन डीगम तेल के आयात शुल्क मूल्य को ₹19 प्रति क्विंटल घटाया है.

महाराष्ट्र और तेलंगाना में सरकारी संस्था ‘नेफेड’ (NAFED) ने सोयाबीन बेचने के लिए कम बोली लगाने वाली निविदाओं (Tenders) को निरस्त कर दिया है. जानकारों का मानना है कि किसानों के हित में सरकार को अगले 4-5 महीनों तक सोयाबीन की बिक्री रोक-रोक कर (सीमित मात्रा में) करनी चाहिए.

मूंगफली तेल के दाम रहे स्थिर

गर्मी की नई फसल की आवक शुरू होने की चर्चाओं के बीच इस हफ्ते मूंगफली तेल-तिलहन के दाम बिना किसी बदलाव के स्थिर बने रहे. राहत की बात यह है कि आयातित सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil) के मुकाबले मूंगफली तेल फिलहाल सस्ता मिल रहा है, हालांकि इसका दाम अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रहा है.

इस हफ्ते का नया ‘रेट कार्ड’ (थोक भाव)

बीते सप्ताह के अंत में विभिन्न तेल-तिलहन के बंद भाव इस प्रकार दर्ज किए गए.

सरसों और बिनौला बाजार (तेजी का रुख)

  • सरसों दाना: ₹150 की तेजी के साथ ₹7,775 से ₹7,800 प्रति क्विंटल
  • सरसों तेल (थोक): ₹50 के सुधार के साथ ₹15,700 प्रति क्विंटल
  • सरसों पक्की घानी: ₹25 के सुधार के साथ ₹2,600 से ₹2,700 प्रति टिन (15 किलो)
  • सरसों कच्ची घानी: ₹25 के सुधार के साथ ₹2,600 से ₹2,745 प्रति टिन (15 किलो)
  • बिनौला तेल: ₹75 के सुधार के साथ ₹15,925 प्रति क्विंटल

सोयाबीन बाजार

  • सोयाबीन दाना: ₹200 की गिरावट के साथ ₹7,425 से ₹7,475 प्रति क्विंटल
  • सोयाबीन लूज: ₹200 की गिरावट के साथ ₹7,075 से ₹7,150 प्रति क्विंटल
  • सोयाबीन तेल (दिल्ली): ₹100 की गिरावट के साथ ₹15,800 प्रति क्विंटल
  • सोयाबीन इंदौर तेल: ₹100 की गिरावट के साथ ₹15,750 प्रति क्विंटल
  • सोयाबीन डीगम तेल: ₹140 की गिरावट के साथ ₹12,170 प्रति क्विंटल

पाम ऑयल और मूंगफली बाजार

  • क्रूड पाम ऑयल (CPO): ₹25 की गिरावट के साथ ₹13,950 प्रति क्विंटल
  • पामोलीन (दिल्ली): ₹125 की गिरावट के साथ ₹15,750 प्रति क्विंटल
  • पामोलीन (कांडला): ₹125 की गिरावट के साथ ₹14,600 प्रति क्विंटल
  • मूंगफली तिलहन: बिना बदलाव के ₹6,725 से ₹7,200 प्रति क्विंटल
  • मूंगफली तेल (गुजरात): स्थिरता के साथ ₹16,000 प्रति क्विंटल

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस बात पर गंभीरता से विचार और समीक्षा करनी चाहिए कि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में, जहां पहले भारी मात्रा में तिलहन (Oilseeds) उगाया जाता था, वहां के किसान इसे छोड़कर धान की खेती की तरफ क्यों मुड़ गए. अगर उन कारणों को समझकर दूर किया जाए, तो भारत खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है.

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Published by: Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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