LPG Price Hike: आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है. आज यानी 7 जून से घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है. पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है. इससे पहले 7 मार्च को भी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे. इस नए बदलाव के बाद देश के अलग-अलग राज्यों और प्रमुख शहरों में गैस सिलेंडर की कीमतें बदल गई हैं. आइए जानतें हैं की बदलाव के बाद आपके शहर में क्या नया रेट है.
अब आपके शहर में कितना है दाम?
स्थानीय टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च अलग होने के कारण हर राज्य और शहर में एलपीजी के दाम अलग-अलग होते हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद 14.2 किलो के भरे हुए घरेलू सिलेंडर के पुराने और नए रेट इस प्रकार हैं:
एलपीजी सिलेंडर की नई और पुरानी दरें:
| राज्य | पुराना रेट | नया रेट – बढ़ने के बाद |
| बिहार | 1002.5 | 1031.5 |
| झारखंड | 970.5 | 999.5 |
| उत्तर प्रदेश | 950.5 | 979.5 |
| पश्चिम बंगाल | 939.0 | 968.0 |
| कर्नाटक | 915.5 | 944.5 |
| दिल्ली | 913.0 | 942.0 |
| मुंबई | 912.5 | 941.5 |
अचानक क्यों बढ़े सिलेंडर के दाम?
दाम बढ़ने की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव और संघर्ष है. इस वजह से ग्लोबल लेवल पर एनर्जी और फ्यूल की सप्लाई प्रभावित हुई है और इंटरनेशनल मार्केट में कीमतें बढ़ गई हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के बाद भी सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है, क्योंकि सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ कंज्यूमर्स पर नहीं डाल रही है.
क्या दूसरे फ्यूल भी महंगे हुए हैं?
हां, सिर्फ रसोई गैस ही नहीं, बल्कि दूसरे फ्यूल की कीमतें भी बढ़ी हैं. मई के बीच से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है. वहीं, सीएनजी (CNG) के दाम भी लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गए हैं. इसके बावजूद तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
क्या देश में गैस की किल्लत होगी?
मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है. हमारे रिफाइनरी प्लांट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और देश के पास पेट्रोल, डीजल व एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. इसके अलावा, घरेलू लेवल पर एलपीजी का प्रोडक्शन बढ़ाया गया है और डिलीवरी वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल तकनीकों (जैसे DAC कोड) का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि कालाबाजारी रुक सके.
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