अगर आप Bitcoin, Ethereum या किसी भी Virtual Digital Asset (VDA) में निवेश करते हैं, तो आपके लिए एक अहम अपडेट आया है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने Income Tax Act, 2025 के तहत क्रिप्टो एसेट की रिपोर्टिंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है. इसका मकसद क्रिप्टो लेनदेन की रिपोर्टिंग को एक जैसे नियमों के तहत लाना और टैक्स अनुपालन को बेहतर बनाना है.
हालांकि, राहत की बात यह है कि क्रिप्टो निवेशकों पर टैक्स के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. पहले की तरह मुनाफे पर 30% टैक्स और तय लेनदेन पर 1% TDS लागू रहेगा.
क्या बदला है?
नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा असर क्रिप्टो एक्सचेंजों पर पड़ेगा. अब सभी Reporting Financial Institutions (RFIs) और क्रिप्टो सेवाएं देने वाले कारोबारियों को एक तय प्रक्रिया के तहत आयकर विभाग को ट्रांजैक्शन की जानकारी देनी होगी. इससे अलग-अलग रिपोर्टिंग फॉर्मेट की जगह एक समान सिस्टम लागू होगा और आयकर विभाग के लिए निवेशकों की दी गई जानकारी का मिलान करना आसान हो जाएगा.
क्या निवेशकों को कोई नया ITR भरना होगा?
नहीं. CBDT की इस गाइडलाइन में निवेशकों के लिए न तो कोई नया Income Tax Return (ITR) फॉर्म लाया गया है और न ही कोई अतिरिक्त टैक्स अनुपालन जोड़ा गया है. यानी टैक्स भरने का तरीका पहले जैसा ही रहेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब एक्सचेंजों से मिलने वाली जानकारी और आपके ITR में दी गई जानकारी का आसानी से मिलान किया जा सकेगा.
क्रिप्टो एक्सचेंजों को क्या करना होगा?
Income Tax Act, 2025 की Section 509 के तहत क्रिप्टो एक्सचेंजों को Form 167 के जरिए हर साल रिपोर्ट जमा करनी होगी.
- रिपोर्ट में 2026 के कैलेंडर वर्ष के सभी योग्य लेनदेन शामिल होंगे.
- पहली रिपोर्टिंग वर्ष 2027 में की जाएगी.
- इससे आयकर विभाग को एक जैसे फॉर्मेट में और भरोसेमंद डेटा मिलेगा.
निवेशकों को अब किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
नई रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होने के बाद निवेशकों को अपने रिकॉर्ड पहले से ज्यादा व्यवस्थित रखने होंगे.
इन बातों का ध्यान रखें:
- हर उस क्रिप्टो एक्सचेंज का वार्षिक स्टेटमेंट डाउनलोड करें, जहां आपने ट्रेडिंग की है.
- अगर कोई पुराना या निष्क्रिय (Dormant) अकाउंट है, तो उसका रिकॉर्ड भी रखें.
- TDS सर्टिफिकेट और ITR में दिखाई गई क्रिप्टो आय का मिलान करें.
- अगर आपने कई एक्सचेंजों पर निवेश किया है, तो सभी ट्रांजैक्शन की जांच करके ही ITR दाखिल करें.
नई व्यवस्था का उद्देश्य नया टैक्स लगाना नहीं, बल्कि क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग को अधिक पारदर्शी और एक जैसा बनाना है. ऐसे में 2026 से निवेशकों के लिए अपने सभी रिकॉर्ड सही रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो जाएगा, ताकि ITR और एक्सचेंज के डेटा में किसी तरह का अंतर न रहे.
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