Crude Oil Price: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी हलचल देखने को मिल रही है. सोमवार को तेल की कीमतों में पिछले एक महीने की सबसे बड़ी तेजी आई. इसके बाद मंगलवार को कीमतें थोड़ी थमी जरूर हैं, लेकिन बाजार में असमंजस का माहौल है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है. पिछले ही सेशन में कीमतों में 5% से ज्यादा का तगड़ा उछाल आया था, जिससे आने वाले दिनों में फ्यूल महंगा होने का डर बढ़ गया है.
तेल की कीमतों में अचानक उबाल क्यों आया?
इस तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से आ रहे अलग-अलग सिग्नल्स हैं. दरअसल, पहले ऐसी खबरें आईं कि इजरायल द्वारा लेबनान में की गई सैन्य कार्रवाई के विरोध में ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत रोक दी है. इस खबर के आते ही तेल बाजार में हड़कंप मच गया और कीमतें तेजी से ऊपर भागने लगीं. हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि ईरान के साथ बातचीत अभी बंद नहीं हुई है, बल्कि जारी है. ट्रंप के इस बयान के बाद बढ़ती कीमतों पर थोड़ा ब्रेक लगा.
खाड़ी देशों में ऐसा क्या हुआ कि ट्रेडर्स डर गए?
सबसे बड़ी चिंता तेल सप्लाई के रास्तों को लेकर है. ईरान की एक न्यूज एजेंसी (तस्नीम) ने रिपोर्ट दी कि ईरान और उसके साथी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंडेब (Bab el-Mandeb) जैसे जरूरी समुद्री रास्तों को पूरी तरह बंद करने पर विचार कर रहे हैं. ये दोनों रास्ते दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण रूट हैं. अगर ये बंद होते हैं, तो दुनिया में तेल का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में उम्मीद जताई है कि अगले एक हफ्ते के भीतर इस रास्ते को खुला रखने के लिए ईरान के साथ समझौता हो सकता है, बस कुछ मुद्दों को सुलझाना बाकी है.
डोनाल्ड ट्रंप और लेबनान विवाद का क्या कनेक्शन है?
मिडल ईस्ट में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिसने मामले को और उलझा दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी और उन्हें लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़ा सैन्य ऑपरेशन न करने की सलाह दी, जिसके बाद इजरायली सेना पीछे हट गई. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी हिजबुल्लाह के करीबियों से भी बात हुई है और दोनों पक्ष फिलहाल सीजफायर पर सहमत हैं. लेबनान सरकार भी इस सीजफायर को पूरे देश में लागू करवाने के लिए लगातार बातचीत कर रही है. जब तक यह सीजफायर स्थायी नहीं होता, तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव ऐसे ही जारी रहेगा.
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