COVID-19 के कारण शेयर बाजार में हाहाकार, लेकिन सोना चढ़ा, जानें प्रति दसग्राम कीमत

COVID-19 screams in stock market but gold rises : शेयर बाजारों में वैश्विक स्तर पर भारी गिरावट के बीच स्थानीय वायदा बाजार में सोना 1.01 प्रतिशत तक चढ़ कर 40,765 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया. वैश्विक सर्राफा बाजार में सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने में रुचि बढ़ने के संकेते के बीच स्थानीय बाजार में सटोरियों ने पीली धातु पर दाव बढ़ा रखा था.

नयी दिल्ली : शेयर बाजारों में वैश्वि�� स्तर पर भारी गिरावट के बीच स्थानीय वायदा बाजार में सोना 1.01 प्रतिशत तक चढ़ कर 40,765 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया. वैश्विक सर्राफा बाजार में सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने में रुचि बढ़ने के संकेते के बीच स्थानीय बाजार में सटोरियों ने पीली धातु पर दाव बढ़ा रखा था.

मल्टी कमाडिटी एक्सचेंज में सोना अप्रैल डिलिवरी 407 रुपये (1.01 प्रतिशत) चढ़ कर 40,765 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. अप्रैल के अनुबंधों में कुल 1,464 लाट के लिए कारोबार हुआ. इसी तरह जून डिलिवरी सोने में 562 रुपये यानी 1.39 प्रतिशत की बढ़त दिखी और भाव 40,965 रुपये बोला गया. जून डिलिवरी सोने में कुल 258 लाट के सौदे हुए. विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक बाजारों में सोने में तेजी के संकेत पर स्थानीय बाजार में सटोरियों ने इस पर दाव ऊंचा कर दिया था. इससे बाजार चढ़ गया. न्यूयार्क में सोना 0.90 प्रतिशत की तेजी के साथ प्रति औंस 1,501.50 डालर के स्तर पर पहुंच गया था.

एशियाई शेयर बाजारों में आज भीषण गिरावट दिखी. मुंबई बाजार का सेंसेक्स कारोबार के दौरान एक समय 10 प्रतिशत से भी नीचे आ गया था और एक सीमा से अधिक गिरावट के कारण बाजार में कारोबार स्थगित कर दिया गया है. बाद में बाजार खुलने पर भी सूचकांक में गिरावट का सिलसिला बना हुआ था.कोरोना वायरस के संक्रमण के संकट से इस समय दुनिया भरत में डर और अनिश्चितता की धारणा गहरा रही है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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