Coronavirus प्रभावित वुहान से लौटे छात्र ने सुनायी आपबीती : कहा - भूतहा बन गया है शहर, सड़कें वीरान

चीन का वुहान शहर पूरी तरह से कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में है. चीन के इस शहर में महाराष्ट्र के लातूर का आशीष कुर्मे एमबीबीएस की पढ़ाई करने के गये थे. पिछले दिनों उन्हें भारत लाया गया. उन्होंने एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में आपबीती बतायी.

औरंगाबाद : चीन के वुहान शहर से हाल ही में लौटे एक छात्र ने जब वहां के हालात के बारे में बताना शुरू किया, तो ऐसा लगा जैसे कि वह किसी फिल्म के ‘भूतहा’ शहर की बात कर रहा हो. उसने बताया कि पूरा शहर वीरान पड़ा हुआ है, सड़कें और गलियां सुनसान हैं, सार्वजनिक परिवहन बिल्कुल न के बराबर दिख रहे हैं. वुहान के पास स्थित एक विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र आशीष कुर्मे ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला 8 दिसंबर, 2019 को आया था, लेकिन उसके इस कदर फैल जाने की सूचना उन्हें जनवरी के पहले हफ्ते में मिली.

महाराष्ट्र में लातूर जिला निवासी आशीष कुर्मे भी उन भारतीयों में शुमार थे, जिन्हें वायरस का खतरा बढ़ने के बाद चीन से वापस लाया गया था. कुर्मे ने बताया कि शुरुआत में शहर में कहीं भी आने-जाने पर रोक नहीं थी, लेकिन कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही सबकुछ बंद कर दिया गया. आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया. एक मराठी समाचार चैनल से गुरुवार रात को बातचीत में कुर्मे ने बताया कि विश्वविद्यालय में 27 दिसंबर, 2019 से 3 जनवरी, 2020 के बीच परीक्षाएं हुईं.

उन्होंने कहा कि पहला मामला आठ दिसंबर को सामने आया, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी जनवरी के पहले हफ्ते में हुई. कुर्मे ने दावा किया कि वुहान की सड़कों पर लाशें पड़ी होने की वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं. उन्होंने कहा कि भारत आने के बाद मुझे ऐसे वीडियो का पता चला. उन्होंने कहा कि जनवरी के पहले हफ्ते से ही प्रतिदिन शरीर के तापमान की निगरानी शुरू कर दी गयी थी. हम लोग आराम से घूम रहे थे और मैं 23 जनवरी तक अपने दोस्तों के पास और बाजार भी गया, लेकिन इस दिन तालाबंदी की घोषणा की गयी और हमारी आवाजाही रोक दी गयी.

कुर्मे ने बताया कि हमें अपने घरों में बंद कर दिया गया और हमारे शिक्षकों ने हमारी जरूरतों का ध्यान रखा. जब तक हम वहां थे, किसी चीनी नागरिक को हमारे कैंपस में प्रवेश करने की इजाजत नहीं थी. हालात बिगड़ने के बाद हमने घर लौटने का फैसला किया. कुर्मे ने कहा कि हमें मास्क दिये गसे थे. तालाबंदी के बाद हमारे स्वास्थ्य की कड़ी निगरानी की जा रही थी. हमने भारत वापस जाने का फैसला किया, लेकिन पता चला कि वुहान हवाईअड्डा बंद है.

एमबीबीएस छात्र ने बताया कि बीजिंग स्थित भारतीय उच्चायोग ने बस का इंतजाम किया और हमें हवाईअड्डे लाया गया. उन्होंने बताया कि वापस आने के बाद मुझे 14 दिनों के लिए अलग रखा गया और निगरानी पूरी होने के बाद घर (लातूर) भेज दिया गया. कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित चीन में इसके चलते तीन हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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