सस्ती बिजली और रोजगार पर फोकस, कोयला मंत्रालय शुरू करेगा 17 अप्रैल से नीलामी का 15वां दौर

Commercial Coal Mine Auction: कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल को कमर्शियल कोल माइन ऑक्शन का 15वां दौर शुरू करने वाला है. जानिए कैसे यह नीलामी भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत बनाएगी.

Commercial Coal Mine Auction: भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल को कमर्शियल कोल माइन ऑक्शन (व्यावसायिक कोयला खदान नीलामी) के 15वें दौर की शुरुआत करेगा. इस खास मौके पर मुंबई में एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन (हितधारक परामर्श) का भी आयोजन किया जाएगा, जिसकी थीम ‘आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला’ रखी गई है.

इस कार्यक्रम में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. सरकार का लक्ष्य घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ाकर विदेशों से होने वाले आयात को कम करना है.

क्या है नई नीलामी की तैयारी?

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, इस 15वें दौर में सरकार पूरी तरह से खोजी गई (fully explored) और आंशिक रूप से खोजी गई (partially explored) कोयला खदानों को पेश करेगी. यह नीलामी केवल बड़ी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि नए निवेशकों और आधुनिक तकनीक वाली छोटी फर्मों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर है. खदानों को निजी हाथों में देने का मकसद सेक्टर में पारदर्शिता लाना और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है.

आम आदमी और उद्योगों को क्या होगा फायदा?

2020 में शुरू हुई कमर्शियल माइनिंग की नीति ने कोयला क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है. जब देश में कोयले का उत्पादन बढ़ेगा, तो बिजली, स्टील और सीमेंट जैसे मुख्य उद्योगों को कच्चा माल आसानी से और सस्ते दामों पर मिल सकेगा. इससे न केवल उद्योगों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को भी सस्ती और बिना रुकावट वाली बिजली मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है. साथ ही, इन खदानों के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए मौके पैदा होंगे.

आत्मनिर्भर भारत के लिए यह क्यों जरूरी है?

भारत की ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है. वर्तमान में, हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से महंगा कोयला खरीदना पड़ता है. ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत सरकार चाहती है कि हम अपनी जरूरतों के लिए खुद के संसाधनों पर निर्भर रहें. नीलामी का यह नया दौर निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा और देश के ऊर्जा इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत और लचीला बनाएगा.

क्या इस बदलाव से निवेश बढ़ेगा?

जी हां, मंत्रालय का मानना है कि नीलामी का यह पारदर्शी ढांचा निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रहा है.  इससे पहले हुए राउंड्स में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, जिससे घरेलू उत्पादन में सुधार देखा गया है. सरकार की कोशिश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने की आसानी को बढ़ावा देना है, ताकि कोयला क्षेत्र में एफिशिएंसी आए और देश को लंबे समय तक सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा मिलती रहे. 

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By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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