समय पर बिल चुकाने के बाद भी क्यों गिर जाता है आपका क्रेडिट स्कोर? जानिए बैंकों की इस चालाकी का तोड़

CIBIL Score Drop : समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के बाद भी क्या आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर गिर गया है? असल में यह आपकी नहीं, बल्कि बैंकों की ‘आलस’ वाली चालाकी है. जानिए आरबीआई के नए नियम आपको इस नुकसान से कैसे बचाएंगे.

CIBIL Score Drop : आपने महीने भर अपनी उंगलियां घिसकर मेहनत की. सैलरी आई तो सबसे पहले क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाया, वह भी ड्यू डेट (आखरी तारीख) से तीन दिन पहले. मन में तसल्ली थी कि भाई, अब सिबिल स्कोर तो बढ़ेगा ही. अगले महीने होम लोन के लिए अप्लाई करना है, तो सब सही होना चाहिए. लेकिन जब अगले महीने क्रेडिट रिपोर्ट चेक की, तो पैरों तले जमीन खिसक गई.

सिबिल स्कोर 750 से गिरकर 720 पर आ गया! आखिर ये हुआ कैसे? क्या बैंक ने आपके पैसे डुबो दिए या फिर ये कोई तकनीकी खराबी (Technical Glitch) है? असल में, यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) की ‘आलस’ वाली चालाकी है.

आप अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन बैंक आपकी पेमेंट की जानकारी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICs) जैसे सिबिल, इक्विफैक्स या एक्सपीरियंस को देने में हफ्तों की देरी कर देते हैं.

नतीजा यह होता है कि आपकी पेमेंट सिस्टम में अपडेट ही नहीं होती, आपकी फाइल पर ‘पेंडिंग’ का ठप्पा लगा रहता है और क्रेडिट कंपनियों के एल्गोरिदम को लगता है कि आपने बिल भरा ही नहीं है.

क्रेडिट स्कोर का गणित और बैंकों का ‘बल्क’ खेल

सिबिल (CIBIL) स्कोर असल में आपकी आर्थिक कुंडली है. बैंक जब आपको लोन देता है, तो वह इसी स्कोर को देखकर तय करता है कि आपको लोन देना कितना सुरक्षित है. आरबीआई के नियमों (RBI Guidelines) के मुताबिक, बैंकों को यह डेटा हर महीने अपडेट करना अनिवार्य है. लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर बैंक इसे ‘बल्क’ (एक साथ भारी मात्रा में) अपडेट करते हैं.

इसे एक उदाहरण से समझिए

  • 5 तारीख: आपने अपने क्रेडिट कार्ड का बिल भरा.
  • 20 तारीख: बैंक ने अपना डेटा क्रेडिट कंपनी को भेजा.
  • 25 तारीख: क्रेडिट कंपनी ने उसे प्रोसेस करने में 5 दिन लगा दिए.

इस 20 दिनों के बीच में अगर आपने किसी होम लोन या कार लोन के लिए अप्लाई कर दिया, तो नए बैंक को आपका पुराना और गिरा हुआ स्कोर ही दिखेगा.

एक्सपर्ट्स की राय

इस मुद्दे को लेकर बैंकिंग सेक्टर के जानकार भी हैरान हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक प्राइवेट बैंक मैनेजर ने बताया कि बैंक जानबूझकर डेटा अपडेटिंग को प्राथमिकता पर नहीं रखते क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ एक ‘ऑपरेशनल कॉस्ट’ (अतिरिक्त खर्च) है.

वित्तीय सलाहकार गौरव शर्मा कहते हैं “बैंकों के लिए सिबिल रिपोर्ट को तुरंत अपडेट करना बहुत आसान है, लेकिन वे इसे बोझ समझते हैं. एक युवा, जिसका सिबिल स्कोर लापरवाही के कारण 750 से कम हो जाता है, उसे बैंक 1 से 2 परसेंट तक ज्यादा ब्याज दर (Interest Rate) पर लोन ऑफर करते हैं.

यह सीधे तौर पर मिडिल क्लास की जेब पर डाका है.” बैंकिंग ओम्बड्समैन (लोकपाल) से जुड़ी रहीं कानूनी सलाहकार राखी विश्वकर्मा का कहना है कि आरबीआई ने साफ कहा है कि अगर बैंक समय पर डेटा अपडेट नहीं करता, तो कस्टमर को हर्जाना मिलना चाहिए. लेकिन समस्या यह है कि आम आदमी को पता ही नहीं होता कि शिकायत कहां करनी है.

अब क्या करें?

अगर आपका स्कोर भी बिना किसी गलती के गिरा है, तो आपको तुरंत ये 3 कदम उठाने चाहिए:

क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करें: सबसे पहले अपनी विस्तृत क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करें और उस एंट्री (लोन या क्रेडिट कार्ड) को खोजें जिसकी जानकारी गलत या अधूरी दिख रही है.

बैंक से सबूत मांगें : अगर आपने बिल समय पर भर दिया है, तो बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क कर उसका ‘पेमेंट कंफर्मेशन’ (Payment Confirmation) लिखित या ईमेल पर मांगें. बैंक की वेबसाइट पर इस गलत एंट्री को लेकर ‘डिसप्यूट’ (Dispute) दर्ज करें.

RBI ओम्बड्समैन में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी शिकायत के 30 दिनों के अंदर इसे नहीं सुधारता है, तो चुप न बैठें .सीधे ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ के इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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