घर बनाना होगा महंगा! सीमेंट की कीमतों में 5% तक बढ़ोतरी के आसार, जानें क्या है वजह

Cement Prices : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और महंगे क्रूड ऑयल के कारण सीमेंट कंपनियों की लागत बढ़ गई है. ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां सीमेंट के दाम 3 से 5 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं.

Cement Prices : अगर आप आने वाले दिनों में अपना घर बनाने या किसी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब पर असर डाल सकती है. रेटिंग एजेंसी ICRA की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सीमेंट की कीमतें एक बार फिर बढ़ने जा रही हैं.

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण सीमेंट कंपनियों की जेब पर बोझ बढ़ गया है, जिसकी भरपाई के लिए कंपनियां सीमेंट के दाम 3% से 5% तक बढ़ा सकती हैं. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इसकी वजह क्या है.

मिडिल ईस्ट का तनाव और ‘महंगा तेल’ बना वजह

सीमेंट बनाने और उसे मार्केट तक पहुंचाने में होने वाले कुल खर्च का 50% से 55% हिस्सा सिर्फ बिजली, ईंधन (Power & Fuel) और ट्रांसपोर्टेशन (सप्लाई कॉस्ट) पर खर्च होता है. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के बंद होने की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.

पैमानाअनुमान (साल 2025-26)नया अनुमान (साल 2026-27)
क्रूड ऑयल (कच्चा तेल)~$72 प्रति बैरल~$95 प्रति बैरल
सीमेंट की कीमतें (बढ़ोतरी)~2% की रिकवरी3% से 5% की बढ़त

कच्चा तेल महंगा होने से सीमेंट कंपनियों के लिए जरूरी चीजें जैसे पेटकोक (Petcoke), डीजल और पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला पॉलिप्रोपाइलीन (Polypropylene) काफी महंगा हो गया है. अप्रैल 2026 में ही पेटकोक के दाम 19% उछल गए थे, जबकि मई 2026 में डीजल की कीमतों में ₹3.9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है.

क्लिनकराइजेशन (Clinkerisation) क्या है और इसमें ईंधन का क्या रोल है?

सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में ‘क्लिनकराइजेशन’ सबसे जरूरी और सबसे ज्यादा बिजली-ईंधन खपत करने वाला स्टेप्स है. इसमें चूना पत्थर (Limestone) और मिट्टी (Clay) को एक विशाल घूमती हुई भट्टी (Rotary Kiln) में डालकर बेहद ऊंचे तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे सीमेंट के छोटे-छोटे कंकड़ (Clinker) बनते हैं. इस भट्टी को चलाने और अपनी खुद की बिजली बनाने के लिए सीमेंट कंपनियां भारी मात्रा में कोयले और पेटकोक का इस्तेमाल करती हैं.

कंपनियों के मुनाफे पर असर, अप्रैल से ही बढ़े दाम

लागत बढ़ने के कारण सीमेंट कंपनियों के प्रति टन मुनाफे (OPBIDTA) में 10% से 15% की गिरावट आने का अनुमान है. कंपनियों का मुनाफा पिछले साल के ₹950-980 प्रति टन से घटकर अब ₹820-870 प्रति टन पर आ सकता है.

बाजार में कड़े मुकाबले के चलते कंपनियां पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं, फिर भी लागत का एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों से ही वसूला जाएगा. सीमेंट कंपनियों ने अप्रैल 2026 में ही प्रति बोरी ₹10 से ₹12 की बढ़ोतरी कर दी है. आने वाले समय में बिजली और ईंधन की लागत 10-12% और माल ढुलाई (Freight) व पैकेजिंग का खर्च 6-8% तक बढ़ सकता है.

ICRA की वाइस प्रेसिडेंट अनुपमा रेड्डी के मुताबिक, भले ही लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर थोड़ा दबाव है, लेकिन इसके बावजूद सीमेंट सेक्टर की वित्तीय स्थिति (Credit Profile) मजबूत और स्थिर बनी हुई है. आने वाले महीनों में सीमेंट की कीमतें इस बात पर निर्भर करेंगी कि बाजार में सीमेंट की मांग (Demand) कैसी रहती है.

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Published by: Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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