Petrol-Diesel Price Hike :अगर आप सोच रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से अब राहत मिल जाएगी, तो थोड़ा संभल जाइए. भारत पेट्रोलियम (BPCL) के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दुनिया में चल रहा ऊर्जा संकट इसी तरह जारी रहा, तो देश में ईंधन की कीमतों में एक और बढ़ोतरी होना बिल्कुल तय है.
बता दें कि भारत में पिछले 9 दिनों के भीतर ही तीन बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं. बीते कल (23 मई) और 19 मई को औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि उससे पहले 15 मई को सीधे ₹3 दाम बढ़ाए गए थे.
संकट से निपटने के लिए सरकार के पास बचे हैं सिर्फ 3 रास्ते
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं. राज कुमार दुबे के मुताबिक, नीति निर्माताओं के पास अब सीमित विकल्प हैं और इस संकट से निकलने के केवल तीन ही रास्ते बचे हैं.
- पहला रास्ता: पेट्रोल पंपों पर आम जनता के लिए ईंधन की कीमतें और बढ़ा दी जाएं.
- दूसरा रास्ता: तेल कंपनियां खुद इस घाटे को बर्दाश्त करें और अपने नुकसान को बढ़ने दें.
- तीसरा रास्ता: सरकार आगे आए और फाइनेंसिंग (फंडिंग) के जरिए तेल कंपनियों की मदद करे.
आपके शहर में आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम ?
देश के प्रमुख शहरों में इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं.
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| दिल्ली | 99.51 | 92.49 |
| मुंबई | 108.49 | 95.02 |
| कोलकाता | 110.64 | 97.02 |
| चेन्नई | 105.31 | 96.98 |
| भोपाल | 111.71 | 96.85 |
| रायपुर | 105.36 | 98.47 |
| जयपुर | 109.87 | 95.05 |
| पटना | 111.00 | 97.03 |
| चंडीगढ़ | 98.93 | 86.93 |
| लखनऊ | 99.31 | 92.70 |
अब रूस और अफ्रीका से आ रहा है तेल
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में मचे घमासान के बीच भारत ने समझदारी दिखाते हुए अपनी तेल सप्लाई के रास्तों में बड़ा बदलाव किया है. अब भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है, बल्कि रूस, अफ्रीका और कई अन्य जगहों से तेल मंगा रहा है. बीपीसीएल और अन्य भारतीय ऊर्जा कंपनियों ने अपने नेटवर्क को दोगुना कर दिया है. पहले जहां भारत के पास तेल मंगाने के लिए केवल 20 सप्लाई पॉइंट्स थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है.
क्यों खड़ा हुआ यह संकट ?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे. जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. हालांकि, अप्रैल में दोनों देशों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) हो गया था और पर्दे के पीछे शांति की बातचीत चल रही है, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा हो चुका है.
हॉर्मुज रास्ता बंद होने से बिगड़ी बात: जंग के दौरान ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया था. यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए लाइफलाइन है, क्योंकि दुनिया की कुल तेल सप्लाई का 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है.
जब यह जंग शुरू हुई थी, तब कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो मार्च तक बढ़कर 120 डॉलर तक पहुंच गया. सीजफायर के बाद इसमें थोड़ी गिरावट आई है और फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है. डायरेक्टर दुबे का कहना है कि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को जो नुकसान पहुंचा है, उसे ठीक होने में लंबा समय लगेगा, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा अभी टला नहीं है.
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