डीजल पर VAT कम कर सकते हैं बीजेपी शासित राज्य; जानिए आपके राज्य में कितना है टैक्स

Fuel Price Cut : महंगे कच्चे तेल और बढ़ती महंगाई से आम जनता को राहत देने के लिए बीजेपी शासित राज्य डीजल पर वैट (VAT) घटा सकते हैं. केंद्र की एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद अब राज्यों पर टैक्स कम करने का दबाव है.

Fuel Price Cut : महंगे कच्चे तेल (Crude Oil) और देश में बढ़ती महंगाई से परेशान आम जनता के लिए राहत भरी खबर आ सकती है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्य सरकारें बहुत जल्द पेट्रोल और विशेषकर डीजल पर लगने वाले वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) को कम करने का बड़ा फैसला ले सकती हैं.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही एक बड़ा कदम उठाते हुए डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को 10 रुपये प्रति लीटर घटाकर शून्य (0) कर दिया था, जबकि पेट्रोल पर इसे 3 रुपये घटाया था. अब केंद्र सरकार जल्द ही राज्यों से भी वैट कम करने की अपील कर सकती है, जिसकी शुरुआत बीजेपी शासित राज्यों से होने की उम्मीद है.

सेक्रेटरीज के विशेष ग्रुप की बैठक में हुई चर्चा

मिंट (Mint) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. इस संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सेक्रेटरीज (सचिवों) के एक विशेष ग्रुप ने वैट में कटौती करने पर गंभीरता से चर्चा की है.

डीजल का महंगा होना यानी हर चीज का महंगा होना!

विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल पर फोकस इसलिए है क्योंकि भारत में सालाना 9.47 करोड़ टन की खपत के साथ डीजल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला पेट्रोलियम प्रोडक्ट है. महंगे डीजल का सीधा असर परिवहन (Transportation), खेती-किसानी (Agriculture) और उद्योगों पर पड़ता है. यदि डीजल महंगा होता है, तो माल भाड़ा बढ़ता है, जिससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा का हर सामान महंगा हो जाता है.

आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल महीने में देश की थोक महंगाई (WPI Inflation) 42 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर 8.3% पर पहुंच गई थी, जबकि खुदरा महंगाई (Retail Inflation) भी 13 महीनों के उच्चतम स्तर 3.48% को छू गई थी. ऐसे में वैट कटौती से महंगाई के इस दबाव को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी.

वैट से होती है राज्यों की मोटी कमाई

ईंधन पर वैट घटाना आम जनता के लिए तो अच्छी खबर है, लेकिन राज्यों की तिजोरी के लिए यह थोड़ा मुश्किल फैसला होता है. वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में राज्यों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगाकर कुल 3.08 ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये जुटाए थे. पैट्रोलियम प्लानिंग और एनालाइसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा वैट कलेक्शन करने वाले शीर्ष 3 राज्य ये रहे.

  • महाराष्ट्र: ₹36,992.2 करोड़
  • उत्तर प्रदेश: ₹31,214.1 करोड़
  • तमिलनाडु: ₹24,861.3 करोड़

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि राज्य सरकारें पहले से ही वेतन, पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं के खर्चों के कारण राजस्व (Revenue) जुटाने के लिए मेहनत कर रही हैं, इसलिए वैट में कोई भी कटौती बहुत सोच-समझकर की जाएगी ताकि उपभोक्ताओं को राहत भी मिले और राज्यों का बजट भी न बिगड़े.

जानिए आपके राज्य में डीजल पर कितना है VAT ?

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डीजल पर लगने वाले वैट की दरें काफी अलग हैं. कुछ राज्यों में वैट की जगह MST (मोटर स्पिरिट और डीजल ऑयल टैक्स) वसूला जाता है.

BJP और NDA शासित राज्यों में वैट की स्थिति

  • दिल्ली: 16.75%
  • उत्तर प्रदेश: 17.08%
  • महाराष्ट्र: 21%
  • गुजरात: 14.9%
  • बिहार: 16.37%
  • असम: 22.19%
  • ओडिशा: 24%

देश में सबसे ज्यादा वैट वसूलने वाले राज्य

  • तेलंगाना: 27%
  • ओडिशा: 24%
  • छत्तीसगढ़: 23%
  • केरल: 22.76%
  • आंध्र प्रदेश: 22.25%

देश में सबसे कम वैट वसूलने वाले राज्य/प्रदेश

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: 1% (सबसे कम टैक्स वाला केंद्र शासित प्रदेश)

  • लद्दाख: 6% (MST)
  • अरुणाचल प्रदेश: 7%
  • मिजोरम: 10%
  • तमिलनाडु: 11%

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By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

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शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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