तेल की कमी से जूझ रहा बांग्लादेश, भारत ने भेजा 5000 टन डीजल

India-Bangladesh Friendship Pipeline: यह सप्लाई 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी (असम) और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के बीच हुए ‘सेल-पर्चेज एग्रीमेंट’ का हिस्सा है.

India-Bangladesh Friendship Pipeline: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिसका असर अब दक्षिण एशिया के रसोई घरों से लेकर रिफाइनरियों तक साफ दिखने लगा है. जहां भारत में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत और कीमतों में उछाल की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर भारत ने अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश को ‘India-Bangladesh Friendship Pipeline’ के जरिए डीजल की सप्लाई शुरू कर दी है.

भारत में कमर्शियल एलपीजी (LPG) का संकट

मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने के कारण भारत में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत शुरू हो गई है.

  • सप्लाई में कमी: कई प्रमुख गैस कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई कम कर दी है, जिससे रेस्टोरेंट और होटल उद्योग पर भारी दबाव है.
  • बढ़ती कीमतें: 10 मार्च 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹114.5 तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि घरेलू सिलेंडर के दाम भी ₹60 तक बढ़े हैं.
  • सरकार का कदम: केंद्र सरकार ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू कर रिफाइनरियों को घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि आम जनता को किल्लत का सामना न करना पड़े.

बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल: समझौता या मेहरबानी ?

इसी संकट के बीच, मंगलवार (10 मार्च 2026) को भारत ने इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन (IBFP) के जरिए 5,000 टन डीजल बांग्लादेश भेजा. सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ी है, लेकिन इसके पीछे ठोस द्विपक्षीय कारण हैं.

  • पुराना समझौता: यह सप्लाई 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी (असम) और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के बीच हुए ‘सेल-पर्चेज एग्रीमेंट’ का हिस्सा है.
  • सालाना कोटा: भारत को इस साल कुल 1.8 लाख टन डीजल भेजना है. समझौते के मुताबिक, हर 6 महीने में कम से कम 90,000 टन डीजल की सप्लाई अनिवार्य है.
  • पाइपलाइन की ताकत: 131 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सिलीगुड़ी (भारत) को पार्वतीपुर (बांग्लादेश) से जोड़ती है और इसकी क्षमता सालाना 10 लाख मीट्रिक टन डीजल भेजने की है.

बांग्लादेश में ऊर्जा आपातकाल जैसे हालात

बांग्लादेश इस समय अपने सबसे बुरे ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. ईंधन और गैस की कमी के कारण वहां की सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं.

  • शिक्षण संस्थान बंद: बिजली और ईंधन बचाने के लिए बांग्लादेश ने सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को समय से पहले बंद कर दिया है और ईद की छुट्टियां पहले घोषित कर दी हैं.
  • फैक्ट्रियों पर ताला: गैस की भारी कमी के चलते 5 में से 4 बड़ी सरकारी खाद (Fertilizer) फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा है ताकि बची हुई गैस से बिजली घर चलाए जा सकें.
  • राशनिंग और छापेमारी: बांग्लादेश में गाड़ियों के लिए तेल की बिक्री सीमित कर दी गई है और अवैध जमाखोरी रोकने के लिए पेट्रोल पंपों पर मोबाइल कोर्ट के जरिए छापेमारी की जा रही है.

‘नेबरहुड फर्स्ट’ और रणनीतिक जिम्मेदारी

मिडल ईस्ट की जंग ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है. जहां भारत अपनी घरेलू जरूरतों (विशेषकर रसोई गैस) को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं बांग्लादेश को डीजल भेजना उसकी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है. यह सप्लाई बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में बिजली और कृषि क्षेत्र को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए संजीवनी का काम करेगी.

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By Abhishek pandey

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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