Ayodhya Ram Lalla Expensive Mango : धार्मिक नगरी अयोध्या से आस्था और आधुनिक कृषि के अनूठे संगम की एक बेहद अद्भुत खबर सामने आई है. अयोध्या धाम में विराजमान भगवान रामलला को दुनिया के सबसे महंगे आम का पहला भोग लगाया गया है.
यह आम कोई साधारण फल नहीं, बल्कि जापान की विश्व प्रसिद्ध ‘मियाजाकी’ (Miyazaki) किस्म का है. वैश्विक बाजार में इस आम को ‘एग ऑफ द सन’ (सूरज का अंडा) के नाम से भी जाना जाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दुर्लभ आम की कीमत 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक होती है. आकार और वजन के हिसाब से इसके महज एक अकेले फल की कीमत करीब 1 लाख रुपये आंकी गई है.
क्यों इतना खास और महंगा है मियाजाकी आम ?
मियाजाकी आम अपनी असाधारण खूबियों के कारण पूरी दुनिया के रईसों और फल प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र रहता है.
- स्वाद और सुगंध: इसमें फाइबर (रेशा) बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है और इसका रस व मिठास इतनी लाजवाब होती है कि इसे खाने के बाद किसी दूसरे आम का स्वाद फीका लगने लगता है.
- पोषक तत्वों से भरपूर: यह आम विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से पूरी तरह समृद्ध होता है.
- जापान में इसे एक राजसी फल का दर्जा प्राप्त है. भारत की जलवायु में इसकी खेती बहुत ही कम और चुनिंदा जगहों पर होती है, जिसके कारण इसकी उपलब्धता बेहद कम और कीमतें आसमान छूती हैं.
अयोध्या के किसान ओमप्रकाश सिंह की अनोखी कामयाबी
इस जापानी आम को अयोध्या की पावन मिट्टी में उगाने का कारनामा स्थानीय प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश सिंह ने कर दिखाया है. उन्होंने करीब दो साल पहले अपनी जमीन पर इस जापानी किस्म का पौधा रोपा था. ओमप्रकाश की कड़ी मेहनत और देखरेख की बदौलत यह विदेशी पेड़ अयोध्या के वातावरण में पूरी तरह ढल गया.
इस सीजन में पेड़ पर लगभग एक दर्जन (12) शानदार फल आए हैं. यहां पके हर एक आम का वजन 150 ग्राम से लेकर 300 ग्राम के बीच दर्ज किया गया है. ओमप्रकाश सिंह के मुताबिक, यह इतिहास में पहली बार हुआ है जब अयोध्या की धरती पर मियाजाकी किस्म का आम सफलतापूर्वक पैदा हुआ है.
गुरु परंपरा के अनुसार रामलला को अर्पित किया पहला फल
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता से खुश होकर किसान ओमप्रकाश सिंह ने सोमवार को स्थानीय रीति-रिवाजों के साथ इस दुर्लभ फसल का पहला पका हुआ आम भगवान रामलला के चरणों में अर्पित कर दिया. प्रभु को भोग लगाते समय फल के ऊपर श्रद्धापूर्वक तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) भी रखा गया. किसान ने भावुक होते हुए बताया कि हमारी सनातन और गुरु परंपरा के अनुसार, खेत की पहली फसल या पेड़ का पहला फल हमेशा अपने इष्ट देव को ही चढ़ाया जाता है. इसी परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने यह अनूठा भोग रामलला को समर्पित किया.
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