Govt Reverses Free Seat Selection Rule: हवाई सफर करने वालों के लिए राहत भरी खबर आते-आते रह गई. केंद्र सरकार ने उस निर्देश को अस्थायी रूप से टाल दिया है, जिसमें एयरलाइंस को हर फ्लाइट की 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क (Extra Charge) के देने को कहा गया था.
यह नियम 20 अप्रैल 2026 से लागू होना था, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों की संस्था ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस’ की आपत्तियों के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसे ‘अगले आदेश तक’ स्थगित कर दिया है. फिलहाल पुराना नियम ही चलता रहेगा, जिसमें केवल 20% सीटें ही मुफ्त चुनी जा सकती हैं.
क्यों टला यह फैसला?
मंत्रालय ने 18 मार्च को डीजीसीए (DGCA) के जरिए यह आदेश दिया था, लेकिन कंपनियों ने निम्नलिखित दलीलें दीं.
- किराये पर असर: कंपनियों का कहना है कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उन्हें घाटा होगा और इसका बोझ टिकट की कीमतों पर पड़ेगा.
- ऑपरेशनल दिक्कतें: सीट चयन की प्रक्रिया और विमान के वजन व संतुलन (Weight & Balance) को मैनेज करने में परेशानी आएगी.
- टैरिफ व्यवस्था: कंपनियों का तर्क है कि भारत में हवाई किराया ‘डिरेगुलेटेड’ है, यानी कंपनियां खुद रेट तय करती हैं, सरकार का इसमें दखल कम होना चाहिए.
| सुविधा | पुराना नियम (जो अभी चलेगा) | नया नियम (जो टल गया) |
| मुफ्त सीटों का कोटा | केवल 20% सीटें | 60% सीटें |
| एक्स्ट्रा चार्ज | ₹500 से ₹3,000 तक | कोई चार्ज नहीं (60% सीटों पर) |
| लागू होने की तारीख | – | 20 अप्रैल 2026 (अब स्थगित) |
भारत का एविएशन मार्केट: तीसरा सबसे बड़ा
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि भले ही यह नियम टला हो, लेकिन भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट बन गया है.
- यात्रियों की संख्या: हर दिन 5 लाख से ज्यादा लोग उड़ान भर रहे हैं.
- सुविधाएं: ‘उड़ान’ योजना के तहत हवाई यात्रा अब आम आदमी की पहुंच में है. एयरपोर्ट्स पर ‘उड़ान यात्री कैफे’ (किफायती खाना), ‘फ्लाईब्रेरी’ (मुफ्त किताबें) और फ्री वाई-फाई जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं.
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