कोरोना वायरस का कहर : वैश्विक बिकवाली से शुक्रवार को धराशायी हो गये बीएसई के तमाम समूह

कोरोना वायरस के कहर से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं थरथरा रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था की बिगड़ी हालत को देखकर निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं. इसका असर भारत के घरेलू शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है और यही कारण है कि बीएसई के तमाम समूहों में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गयी.

नयी दिल्ली : निवेशकों की वैश्विक बिकवाली के बीच शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई के सभी समूहों में गिरावट देखने को मिली. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका की वजह से निवेशकों की धारणा नकारात्मक हुई है. इस कारण निवेशक वैश्विक स्तर पर बिकवाली कर रहे हैं. बीएसई के मेटल ग्रुप में सबसे अधिक 6.04 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी. इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी, मूल सामग्रियां, तकनीक, उद्योग, रियल्टी, ऊर्जा, वाहन और वित्त समूहों में चार फीसदी तक की गिरावट रही. शेष अन्य समूह भी गिरावट में रहे.

वैश्विक स्तर पर 2008 के आर्थिक संकट के बाद यह सबसे बुरा सप्ताह देखने को मिल रहा है. बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1163 अंक यानी 2.93 फीसदी गिरकर 38,582.66 अंक पर चल रहा था. वहीं, एनएसई का निफ्टी भी 350.35 यानी 3.01 फीसदी गिरकर 11,282.95 अंक पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान बीएसई के स्मॉलकैप में 3.45 फीसदी और मिडकैप में 3.53 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

उधर, कोरोना वायरस के भय से आक्रांत शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली देखने को मिली. बीएसई की 1,700 से अधिक कंपनियों में बिकवाली हुई. इनमें से अधिकांश कंपनियां मिडकैप या स्मॉलकैप की हैं. इस बिकवाली के कारण समूह ए, बी, टी और जेड की 323 कंपनियों के शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर आ गये. बीएसई की 205 कंपनियों के शेयरों में स्वीकृत दायरे तक की गिरावट रही. हालांकि, 274 कंपनियों ने बाजार की चाल के विपरीत प्रदर्शन किया और इनके शेयरों में बढ़त रही.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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