होर्मुज संकट का असर भारत में, अदाणी गैस ने कमर्शियल ग्राहकों की सप्लाई घटाई

Adani Gas Supply Cut : मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर दिखने लगा है. अदाणी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने साफ कर दिया है कि वह अपने कुछ ग्राहकों को पूरी गैस नहीं दे पाएगी.

Adani Gas Supply Cut: मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी दिखने लगा है. इसी बीच Adani Total Gas Limited (ATGL) ने अपने ग्राहकों के लिए अहम फैसला लिया है. कंपनी ने संकेत दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण वह कुछ ग्राहकों को पहले जितनी गैस सप्लाई नहीं कर पाएगी. हालांकि राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है.

आम उपभोक्ताओं को राहत, PNG और CNG के दाम स्थिर

घरों में इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और वाहनों के लिए मिलने वाली CNG का उपयोग करने वाले लोगों के लिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है. कंपनी ने इन दोनों श्रेणियों में गैस की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि अदाणी गैस अपनी करीब 70 प्रतिशत गैस भारत के घरेलू स्रोतों से प्राप्त करती है. इसलिए घरेलू उपभोक्ताओं की सप्लाई और कीमतों पर तत्काल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है.

उद्योगों और कमर्शियल ग्राहकों पर असर

यह फैसला उद्योगों और बड़े कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए चुनौती बन सकता है. ये ग्राहक मुख्य रूप से आयातित गैस यानी LNG (Liquefied Natural Gas) पर निर्भर रहते हैं. समुद्री रास्तों, खासकर Strait of Hormuz में पैदा हुई बाधाओं की वजह से विदेशी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसी कारण कंपनी ने ऐसे ग्राहकों से अपनी गैस खपत में लगभग 40 प्रतिशत तक कटौती करने को कहा है. इसका मतलब है कि अब उद्योगों को पहले के मुकाबले कम गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कई सेक्टरों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

तय सीमा से ज्यादा गैस पर भारी कीमत

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई उद्योग अपनी तय सीमा से ज्यादा गैस इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे अतिरिक्त कीमत चुकानी होगी. निर्धारित सीमा तक गैस की औसत कीमत लगभग ₹40 प्रति यूनिट के आसपास रहेगी. लेकिन अगर कोई ग्राहक इससे ज्यादा गैस लेता है तो उसे स्पॉट मार्केट रेट या भारी पेनल्टी देनी पड़ सकती है, जो सामान्य कीमत से दोगुनी तक हो सकती है.

क्यों पैदा हुए ये हालात ?

दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है. भारत में आने वाली बड़ी मात्रा में LNG जहाजों के जरिए इसी क्षेत्र से होकर आती है. जब इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो गैस की सप्लाई घटने लगती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. इसी स्थिति को देखते हुए कंपनियां अपनी सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांट रही हैं.

आगे क्या हो सकता है असर ?

विशेषज्ञों के अनुसार अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा. इससे ऊर्जा लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कई सेक्टरों और अंततः आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है. फिलहाल कंपनी ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनी हुई है.

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By Abhishek pandey

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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