फीकी रह सकती है निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की दीवाली

लखनऊ : हर साल दीपावली पर तोहफों की बारिश से खुश होने वाले कारपोरेट कम्पनियों के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की दीवाली इस बार फीकी रहने की आशंका है. अन्तरराष्ट्रीय बाजार में रपये की कीमत में गिरावट, कम मांग और वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के परिणामस्वरुप कम्पनियों ने इस बार प्रकाश पर्व में उपहार बांटने के […]

लखनऊ : हर साल दीपावली पर तोहफों की बारिश से खुश होने वाले कारपोरेट कम्पनियों के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की दीवाली इस बार फीकी रहने की आशंका है. अन्तरराष्ट्रीय बाजार में रपये की कीमत में गिरावट, कम मांग और वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के परिणामस्वरुप कम्पनियों ने इस बार प्रकाश पर्व में उपहार बांटने के बजट में 20 प्रतिशत तक कटौती की है.
उद्योग मण्डल ‘एसोचैम’ के एक ताजा सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है. इसके मुताबिक आर्थिक विकास में अनिश्चितता भरे उतार-चढाव, कम बारिश के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढोत्तरी, अन्तरराष्ट्रीय बाजार में रपये की कीमत में गिरावट, चीजों की कमजोर मांग, पारिश्रमिक में धीमी वृद्धि और वैश्विक बाजारों में खलबली की वजह से कम्पनियों को दीवाली में उपहार देने के बजट में 20 फीसद तक कटौती करनी पडी है.
एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डी. एस. रावत ने आज यहां एक बयान में बताया कि उद्योग मण्डल ने लखनउ, अहमदाबाद, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, इन्दौर, कोलकाता, बेंगलूरु, चेन्नई, मुम्बई तथा पुणे समेत 10 प्रमुख शहरों में आटोमोबाइल, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा, उर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल, रियल एस्टेट समेत विभिन्न क्षेत्रों की कम्पनियों के 500 प्रतिनिधियों तथा एक हजार कर्मचारियों से बातचीत के आधार पर यह सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार की है.
उन्होंने कहा कि पिछले साल केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद आर्थिक विकास में तेजी की उम्मीद की वजह से कम्पनियों ने दीपावली में उपहार देने का बजट 10 से 15 प्रतिशत तक बढा दिया था लेकिन सरकार आर्थिक विकास का पहिया तेजी से घुमाने के लिये संघर्ष कर रही है. यही वजह है कि व्यवसाय और उद्योगों के लिये हालात बहुत आशाजनक नहीं हैं.
रावत ने कहा कि कम बारिश होने के कारण दालों, खाद्य तेलों तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की वजह से उपभोक्ता भी हाथ रोककर खर्च कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दायरे में लिये गये करीब 60 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने इस बार दीपावली पर दिल खोलकर खर्च करने का इरादा छोड दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी नियोजक कम्पनियां लगभग साल भर कारोबार ठंडा होने की वजह से उन्हें मिलने वाले बोनस में कटौती कर सकती हैं. रावत ने बताया कि ज्यादातर लोगों ने कहा कि वे त्यौहार पर शाहखर्ची करने के बजाय भविष्य की आपातस्थितियों के लिये धन बचाकर रखना चाहेंगे.

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