नयी दिल्ली: रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने गुरुवार को कहा कि लोगों से गैरकानूनी तरीके से जमा राशियां स्वीकार करने वाली कंपनियों पर नकेल डालने के लिये केंद्रीय बैंक कानूनी उपाय पर सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है. ‘राजकाज एवं विकास: जी20 देशों से विचार’ विषय पर यहां आयोजित एक सम्मेलन में गांधी ने कहा, ”कई कंपनियां वित्तीय कंपनियों के रुप में पंजीकृत हैं लेकिन वे रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित नहीं है. अवैध तरीके से धन जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों में कंपनी के रुप में पंजीकृत और बिना कंपनी के रुप में पंजीकृत दोनों तरह की इकाइयां हैं. इन मसलों से निपटने के लिये मौजूदा कानून अपर्याप्त है.”
उन्होंने कहा, ”इन चीजों को ठीक करने तथा इन मसलों को दूर करने के लिये कदम उठाने के लिये हमें सांविधिक प्रावधानों में उपयुक्त संशोधन करने की जरुरत है. रिजर्व बैंक कानून में इस प्रकार के संशोधन के लिये सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है.” गांधी ने कहा कि ये कंपनी के रुप में पंजीकरण के बिना चालने वाली इकाइयां (अनइनकारपोरेटेड इकाइयां) वित्तीय गतिविधियां में शामिल होती हैं लेकिन नियंत्रण मुक्त होती हैं. उन्होंने कहा कि ये गैर-पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) देश में कहीं भी बिना नोटिस में आये काम कर सकती हैं तथा अपने ग्राहकों के हितों को खतरें में डाल सकती हैं.
