Research : उपभोक्ताओं में ‘पाखंड’ का विकार पैदा कर सकती है महंगी चीजों की खरीदारी

बोस्टन : आलीशान एवं महंगी चीजों को भले ही सामाजिक रुतबे एवं विलासिता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि इन चीजों की खरीदारी आपको असहज महसूस करा सकती है. आपके आत्मविश्वास को कम कर सकती है. एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह भाव […]

बोस्टन : आलीशान एवं महंगी चीजों को भले ही सामाजिक रुतबे एवं विलासिता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि इन चीजों की खरीदारी आपको असहज महसूस करा सकती है. आपके आत्मविश्वास को कम कर सकती है. एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह भाव बाद में उपभोक्ताओं में ‘पाखंड के विकार’ का कारण बन सकता है.

महंगी गाड़ियां या महंगे आभूषण खरीदना भले ही खरीदार में रुतबे और विलासिता का भाव जगाता हो, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी, ‘चीजें दोधारी तलवार साबित हो सकती हैं’. अमेरिका के बोस्टन कॉलेज समेत अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं के इस अध्ययन में सामने आया है कि कई उपभोक्ता लग्जरी उत्पादों को ऐसी सुविधा मानते हैं, जिनके वे खुद को लायक नहीं समझते.

शोधकर्ताओं ने प्रेस के लिए जारी बयान में कहा, ‘लग्जरी उत्पादों का इस्तेमाल करना भले ही आपके ऊंचे रुतबे को दिखाता है, लेकिन यह उलटा भी साबित हो सकता है और उपभोक्ताओं को फर्जीपन का एहसास भी करा सकता है. इससे ऐसा भाव पैदा होता है, जिसे हम लोगों ने, ‘विलासिता के कारण पनपा पाखंड का विकार’ नाम दिया है.’

बोस्टन कॉलेज कैरोल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की मार्केटिंग शाखा की एसोसिएट प्रोफेसर नायला ओर्डाबायेवा और उनकी सहयोगियों के इस अध्ययन के मुताबिक, कुछ उपभोक्ता महंगी वस्तुओं का इस्तेमाल करते वक्त या महंगे कपड़े पहनते वक्त उतने सहज नहीं होते. जितने वे सस्ते उत्पादों के इस्तेमाल में होते हैं. यह अध्ययन ‘कंज्यूमर रिसर्च’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

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