एक साल में 10 लाख कैश निकाले, तो लग सकता है टैक्स

साल में 10 लाख रुपये से अधिक कैश निकालने पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है. केंद्र सरकार ऐसी संभावनाओं पर विचार कर रही है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सरकार भारी मात्रा में बैंक से कैश विथड्रॉल करने पर आधार से मिलान को जरूरी करने पर भी विचार कर रही है. इससे […]

साल में 10 लाख रुपये से अधिक कैश निकालने पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है. केंद्र सरकार ऐसी संभावनाओं पर विचार कर रही है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सरकार भारी मात्रा में बैंक से कैश विथड्रॉल करने पर आधार से मिलान को जरूरी करने पर भी विचार कर रही है. इससे बैंक से कैश निकलाने वाले की पहचान हो सकेगी.
साथ ही इसका भी पता लगाया जा सकता है कि उसके कैश लेनदेन का टैक्स रिटर्न जमा हुआ है या नहीं. वर्तमान समय में अभी 50,000 रुपये या उससे अधिक कैश जमा कराने पर पैन कार्ड नंबर का उल्लेख करना जरूरी होता है. इसी तरह 10 लाख निकालने पर आधार भी जरूरी हो सकता है. आधार डिटेल से कैश निकालने पर यूआइडी और ओटीपी के प्रयोग से इसके दुरुपयोग को रोका जा सकेगा.
एक बड़े अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अभी के नियम के मुताबिक मनरेगा के लाभार्थियों को अपना पारिश्रमिक निकालने के लिए भी आधार देना पड़ता है. इसके बाद वेरीफाइ होने के बाद ही उन्हें पैसा दिया जाता है, लेकिन अगर कोई पांच लाख तक कैश निकाल रहा है , तो उसके लिए ऐसा कुछ करने की जरूरत नहीं होती. पांच जुलाई को बजट में इसे पेश किया जा सकता है. लेकिन अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है.
क्या होगा फायदा
मनरेगा के लिए आधार जरूरी, लेकिन पांच लाख कैश के लिए नहीं
पेपर करेंसी का उपयोग कम करना
काले धन के प्रवाह पर रोक लगाना
डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देना
आरबीआइ ने एनइएफटी और आरटीजीएस से लेन देन को मुफ्त कर दिया है, साथ ही एटीएम शुल्क को भी रिवाइज करने पर विचार कर रही है.

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