सर्जिकल स्ट्राइक और हाइड्रोजन बम की दहशत से शेयर बाजार में निवेशकों का डूबा 6.10 लाख करोड़

मुंबई: पिछले ही सप्ताह से गिरावट का रुख झेल रहे घरेलू शेयर बाजार को म्यांमार की सीमा में घुसकर किये जाने वाले सर्जिकल स्ट्राइक और उत्तर कोरिया के हाइड्रोजन बम की दहशत से सबसे बड़ झटका झेलना पड़ा है. उत्तर कोरिया के हाइड्रोजन बम, गिरता रुपया, जीडीपी में गिरावट और फेडरल रिजर्व द्वारा रेट हाइक […]

मुंबई: पिछले ही सप्ताह से गिरावट का रुख झेल रहे घरेलू शेयर बाजार को म्यांमार की सीमा में घुसकर किये जाने वाले सर्जिकल स्ट्राइक और उत्तर कोरिया के हाइड्रोजन बम की दहशत से सबसे बड़ झटका झेलना पड़ा है. उत्तर कोरिया के हाइड्रोजन बम, गिरता रुपया, जीडीपी में गिरावट और फेडरल रिजर्व द्वारा रेट हाइक की आशंका जैसे संकेतों की वजह से शेयर बाजार में नौ महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है. बुधवार को सर्जिकल स्ट्राइक की खबरें आने के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट हुई और निवेशकों के 6.10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया.

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सूचना के अनुसार, बुधवार को बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) 1,30,465 लाख करोड़ था, जो 18 सितंबर के 1,36,76,465 लाख करोड़ से 6.18 लाख करोड़ रुपये कम था. एक हफ्ते के गिरावट के दौर में बीएसई सेंसेक्स 3.91 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,270 अंक नीचे गिर चुका है. निफ्टी 136 अंक लुढ़कर 9736 पर बंद हुआ. सेंसेक्स का यह तीन महीने का निचला स्तर है, जबकि निफ्टी डेढ़ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है.

बुधवार को भारतीय सेना द्वारा भारत-म्यांमार सीमा पर सर्जिकल स्ट्राइक की शुरुआती खबरों के बाद सेंसेक्स करीब 450 अंक टूट गया. एक दिन में ही घरेलू स्टॉक्स की मार्केट मूल्यांकन 1.6 लाख करोड़ रुपये कम हो गया. बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन) (के) के उग्रवादियों को भारी नुकसान हुआ है. शुरुआती जानकारी में इसे सेना की सर्जिकल स्ट्राइक माना जा रहा था, लेकिन सेना ने कहा है कि उसने सीमा पार किये बगैर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है.

वहीं दूसरी ओर, भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 99 पैसे गिर चुका है. इस महीने की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 64 पर था, लेकिन अब यह गिरकर 65.78 पर आ चुका है. मार्केट में जारी गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की तरफ से जारी बिकवाली भी है. राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंकाओं से भी बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही.

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