न्यूनतम वेतन के फाॅर्मूले पर विचार करने के लिए सरकार ने बनायी नयी समिति

नयी दिल्लीः गरीबों के भी अब अच्छे दिन आने वाले हैं. इसका कारण यह है कि सरकार ने न्यूनतम वेतन के फाॅर्मूला तय करने के लिए एक समिति का गठन किया है. यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन करीब 18,000 रुपये के आसपास तय करने के फाॅर्मूले पर नये सिरे से विचार करेगी. सरकार […]

By Prabhat Khabar Print Desk | August 4, 2017 9:13 AM

नयी दिल्लीः गरीबों के भी अब अच्छे दिन आने वाले हैं. इसका कारण यह है कि सरकार ने न्यूनतम वेतन के फाॅर्मूला तय करने के लिए एक समिति का गठन किया है. यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन करीब 18,000 रुपये के आसपास तय करने के फाॅर्मूले पर नये सिरे से विचार करेगी. सरकार की आेर से जारी बयान के अनुसार, समिति न्यूनतम जीवनस्तर की लागत तथा औसत परिवार के आकार को ध्यान में रखकर इस फार्मूला पर विचार करेगी.

इस खबर को भी पढ़ियेः न्यूनतम वेतन कोड विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, जानें किन कर्मचारियों को होगा फायदा

श्रम मंत्री बंडारु दत्तात्रेय की अध्यक्षता में गुरुवार को यहां न्यूनतम वेतन कानून के तहत केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक का आयोजन किया गया. बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नामांकित व्यक्ति, उद्योग के अंशधारक और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. बैठक के बाद दत्तात्रेय ने कहा कि सभी बातों पर विचार करने के बाद हमने समिति गठित करने का फैसला किया है, जो न्यूनतम वेतन तय करने के फार्मूला पर विचार करेगी.

न्यूनतम वेतन को लेकर सरकार के प्रस्ताव में इकाइयों अथवा बच्चों समेत तीन आैर छह सदस्यीय परिवार वाली इकाइयों को दोगुना करने पर विचार करने की उम्मीद की गयी है. इसमें प्रत्येक बच्चों को एक इकार्इ के तौर पर विचार करने की भी बात कही गयी है. फिलहाल, न्यूनतम वेतन कानून 1948 के अनुसार, कृषि आैर गैर-कृषि क्षेत्र के कामगारों के लिए एक परिवार में पति-पत्नी आैर दो बच्चों को मिलाकर तीन इकार्इ माना गया है. इस कानून के अनुसार, पूरे देश के कृषि आैर गैर-कृषि क्षेत्र आैर करीब 47 क्षेत्र में यह नियम लागू है.

गुरुवार को आयोजित बैठक में श्रम मंत्री दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार की आेर से गठित कमेटी देश में न्यूनतम वेतन तयर करने के लिए लागू नियमों पर एक बार फिर विचार करेगी. इसके लिए केंद्रीय न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड की पहली बैठक में इसे प्रभावी तौर लागू करने का फैसला किया गया है. बोर्ड की पिछली बैठक सात साल पहले 2010 में आयोजित की गयी थी. उनका कहना है कि न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1948 में बनाया गया कानून काफी पुराना है, जो इस समय लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से सही नहीं है. इसलिए बनायी गयी नयी समिति जल्द ही पुराने नियमों में बदलाव कर न्यूनतम वेतन करने पर विचार करेगी.

कहा यह भी जा रहा है कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों का न्यूनतम वेतन दोगुना करने पर भी सरकार की आेर से जल्द ही दोगुना कर दिया है. इनमें वैसे मजदूर भी शामिल है, जिन्हें इसी मार्च से ठेके पर काम करने के लिए हायर किया गया है. सरकार की आेर से गैर-कृषि क्षेत्र के मजदूरों के न्यूनतम वेतन में करीब 42 फीसदी का इजाफा किया गया था. पिछले साल अगस्त में जिन अकुशल मजदूरों के लिए 350 रुपये प्रति या फिर 9,100 रुपये प्रतिमाह की दर से न्यूनतम मजदूरी तय की गयी थी.

Next Article

Exit mobile version