रिजर्व फ्यूल में ड्राइविंग करना क्यों है खतरनाक? जानिए इससे कार पर क्या असर पड़ता है

Reserve Fuel Driving Risks: रिजर्व फ्यूल पर गाड़ी चलाना छोटी गलती लग सकती है, लेकिन यही आदत आपकी कार को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है. इससे फ्यूल पंप खराब हो सकता है, इंजन पर असर पड़ सकता है और गंदगी सिस्टम में चली जाती है. आइए डिटेल में जानते हैं और कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं.

अक्सर हम सोचते हैं कि फ्यूल वॉर्निंग लाइट जलने तक गाड़ी चलाना कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन यही छोटी सी आदत आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है. जब आपकी गाड़ी में लो फ्यूल लाइट जलती है, तो इसका सीधा मतलब है कि अब टैंक में बस थोड़ा सा ही पेट्रोल बचा है. ‘रिजर्व फ्यूल’ को रोजमर्रा में इस्तेमाल करना सही नहीं है. ये रिजर्व फ्यूल सिर्फ आपको नजदीकी पेट्रोल पंप तक सेफली पहुंचाने के लिए होता है. अगर आप बार-बार इसी पर गाड़ी चलाते हैं, तो इससे आपकी गाड़ी को नुकसान भी हो सकता है. आइए जानते हैं कैसे.

फ्यूल पंप डैमेज हो सकता है 

फ्यूल पंप टैंक के अंदर होता है और उसी पेट्रोल या डीजल से ठंडा और लुब्रिकेट होता रहता है. लेकिन जब फ्यूल बहुत कम हो जाता है, तो पंप फ्यूल की जगह हवा खींचने लगता है. इससे वो जल्दी गर्म होने लगता है और धीरे-धीरे खराब भी हो सकता है.

गंदगी सिस्टम में जा सकती है

समय के साथ फ्यूल टैंक के अंदर थोड़ा-बहुत कचरा, जंग या मिट्टी जमा हो ही जाती है. अब जब आप गाड़ी को रिजर्व में चलाते हैं, तो यही नीचे वाला फ्यूल खींचा जाता है और उसके साथ ये गंदगी भी अंदर चली जाती है. इसका नतीजा ये होगा कि फ्यूल फिल्टर जाम हो सकता है, इंजेक्टर खराब हो सकते हैं और इंजन की परफॉर्मेंस भी धीरे-धीरे गिरने लगती है.

इंजन के परफॉरमेंस पर पड़ता है असर 

कम फ्यूल सीधे आपके इंजन पर असर डालती है. अगर फ्यूल सप्लाई सही नहीं मिलती, तो इंजन झटके देने लगता है, आइडल पर रफ फील होता है और एक्सेलरेशन के समय पावर भी कम लगती है. पेट्रोल कार में तो ये आदत महंगी भी पड़ सकती है, क्योंकि इससे कैटेलिटिक कन्वर्टर तक खराब हो सकता है.

ड्राइविंग के समय सेफ्टी रिस्क बढ़ जाता है 

अगर आप गाड़ी चला रहे हैं और अचानक बीच सड़क पर पेट्रोल खत्म हो जाए तो ये खतरनाक स्थिति बन सकती है. इंजन बंद होते ही स्टेयरिंग भारी हो जाता है, ब्रेक भी सही से काम नहीं करते और गाड़ी बीच रास्ते में रुक सकती है. खासकर हाईवे या भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ये जोखिम और बढ़ जाता है.

फ्यूल गेज पर आंख बंद कर न करें भरोशा

अगर आप भी गाड़ी के फ्यूल गेज पर पूरी तरह भरोसा करते हैं, तो थोड़ा अलर्ट हो जाइए. ये मीटर हमेशा 100% सही नहीं होता. सड़क का ढलान, ड्राइविंग कंडीशन और सेंसर की गड़बड़ी इसकी रीडिंग को बदल सकते हैं. यानी डिस्प्ले कुछ और दिखाए और टैंक में फ्यूल कम निकले ऐसा होना बिल्कुल मुमकिन है.

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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