सेकेंड-हैंड कार खरीद रहे हैं? इन 5 बातों का नहीं रखा ख्याल, तो पछताएंगे

Used Car Buying Tips: अगर आप नई कार का सपना तो देख रहे हैं, लेकिन बजट आपको सेकेंड हैंड कार की तरफ ले जा रहा है, तो जरा रुकिए. सेकेंड-हैंड कार सही चुनी जाए तो फायदे का सौदा बन सकती है. लेकिन एक छोटी-सी चूक आगे चलकर जेब और दिमाग दोनों पर भारी पड़ सकती है. इसलिए डील फाइनल करने से पहले यहां बताए गए 5 जरूरी बातों की जांच करना बेहद जरूरी है.

Used Car Buying Tips: मान लीजिए आपने सेकेंड-हैंड कार पसंद कर ली है. कार की टेस्ट ड्राइव भी ठीक रही है, कीमत भी सही लग रही है और अब बस पेमेंट बाकी है. लेकिन यहीं पर ज्यादातर लोग गलती कर बैठते हैं. सही जांच के बिना खरीदी गई कार बाद में बड़ी परेशानी बन सकती है. नई कारों की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग सेकेंड-हैंड कार की तरफ रुख कर रहे हैं. लेकिन सही जांच के बिना खरीदी गई कार में मेंटेनेंस, भरोसे और खर्च से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. ऐसे में खरीदने से पहले 5 बातों का ध्यान जरूर रखें.

शोरूम सर्विस और मेंटेनेंस हिस्ट्री

यूज्ड कार की सर्विस हिस्ट्री से पता चलता है कि गाड़ी की देखभाल कैसी रही है. रेगुलर सर्विस, ऑयल चेंज, ब्रेक और जरूरी रिपेयर का रिकॉर्ड भरोसे का वादा देता है. अगर रिकॉर्ड अधूरा या गायब हो तो फ्यूचर में खर्च बढ़ सकता है. आप कार का रजिस्ट्रेशन नंबर देकर ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से इसकी सर्विस डिटेल निकलवा सकते हैं. आमतौर पर हर 10,000 किमी या एक साल में सर्विस होना सही माना जाता है.

इंश्योरेंस हिस्ट्री जरूर देखें

कार की इंश्योरेंस पॉलिसी में दिए गए IDV और नो-क्लेम बोनस को चेक करें. लगातार नो-क्लेम बोनस मिलने का मतलब है कि कार एक्सीडेंट-फ्री रही है. अगर IDV अचानक कम हो या नो-क्लेम बोनस न हो, तो पहले ही किसी बड़े क्लेम या रिपेयर का फायदा उठाया जा चुका है.

गाड़ी की बाहरी हालत पर ध्यान दें

कार के बाहरी हिस्से में जंग, अलग-अलग कलर की पेंटिंग, पैनल गैप, ज्यादा घिसावट या टूट-फूट एक्सीडेंट या खराब मेंटेनेंस की ओर इशारा करती है. सभी शीशों पर मौजूद एचिंग कोड एक जैसे होने चाहिए. टायर, ब्रेक और अंडरबॉडी भी ध्यान से चेक करें. क्योंकि इनकी मरम्मत महंगी पड़ सकती है.

ओनरशिप और डॉक्यूमेंट्स की जांच

अधिकतर लोग सिंगल-ओनर कार को प्रायोरिटी देते हैं. क्योंकि, गाड़ी का इस्तेमाल सिर्फ एक ही ओनर द्वारा किया जाता है, जिससे इसके यूज हिस्ट्री और डॉक्यूमेंटेशन को वेरिफाई करना आसान हो जाता है. ऐसे में पहले कन्फर्म करें कि RC में दर्ज नाम और पता सेलर के डिटेल्स से मैच हो रहा है या नहीं. गाड़ी के चेसिस और इंजन नंबर में भी कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए.

लीगल डॉक्यूमेंट्स और बकाया राशि

पुरानी गाड़ी खरीदने से पहले यह कन्फर्म करें कि कार के सभी लीगल डॉक्यूमेंट्स सही है. यह चेक करें कि गाड़ी में वैलिड इंश्योरेंस, अपडेटेड PUC और पूरा रोड टैक्स जमा हो. गाड़ी का किसी तरह का लोन, ट्रैफिक चालान या कानूनी केस पेंडिंग न हो. अगर कार लोन पर है या दूसरे राज्य में ट्रांसफर होनी है, तो NOC लेना जरूरी होता है.

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By Shivani shah

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टेक्नोलॉजी सेक्टर में शिवानी शाह की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च/रिव्यूज, गैजेट रिव्यूज, टिप्स एंड ट्रिक्स, बायर्स गाइड, टेलीकॉम अपडेट्स, AI टूल्स/फीचर्स और ट्रेंडिंग टेक टॉपिक्स से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वह नई कार/बाइक/स्कूटर्स की लॉन्चिंग, गाड़ियों के फीचर्स, बायर्स गाइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), ट्रेंडिंग ऑटो टॉपिक्स और अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर सिर्फ लॉन्च और फीचर्स की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को यह भी समझ आए कि वह उनके लिए कितनी काम की है.

शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

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