Used Car Buying Tips: मान लीजिए आपने सेकेंड-हैंड कार पसंद कर ली है. कार की टेस्ट ड्राइव भी ठीक रही है, कीमत भी सही लग रही है और अब बस पेमेंट बाकी है. लेकिन यहीं पर ज्यादातर लोग गलती कर बैठते हैं. सही जांच के बिना खरीदी गई कार बाद में बड़ी परेशानी बन सकती है. नई कारों की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग सेकेंड-हैंड कार की तरफ रुख कर रहे हैं. लेकिन सही जांच के बिना खरीदी गई कार में मेंटेनेंस, भरोसे और खर्च से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. ऐसे में खरीदने से पहले 5 बातों का ध्यान जरूर रखें.
शोरूम सर्विस और मेंटेनेंस हिस्ट्री
यूज्ड कार की सर्विस हिस्ट्री से पता चलता है कि गाड़ी की देखभाल कैसी रही है. रेगुलर सर्विस, ऑयल चेंज, ब्रेक और जरूरी रिपेयर का रिकॉर्ड भरोसे का वादा देता है. अगर रिकॉर्ड अधूरा या गायब हो तो फ्यूचर में खर्च बढ़ सकता है. आप कार का रजिस्ट्रेशन नंबर देकर ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से इसकी सर्विस डिटेल निकलवा सकते हैं. आमतौर पर हर 10,000 किमी या एक साल में सर्विस होना सही माना जाता है.
इंश्योरेंस हिस्ट्री जरूर देखें
कार की इंश्योरेंस पॉलिसी में दिए गए IDV और नो-क्लेम बोनस को चेक करें. लगातार नो-क्लेम बोनस मिलने का मतलब है कि कार एक्सीडेंट-फ्री रही है. अगर IDV अचानक कम हो या नो-क्लेम बोनस न हो, तो पहले ही किसी बड़े क्लेम या रिपेयर का फायदा उठाया जा चुका है.
गाड़ी की बाहरी हालत पर ध्यान दें
कार के बाहरी हिस्से में जंग, अलग-अलग कलर की पेंटिंग, पैनल गैप, ज्यादा घिसावट या टूट-फूट एक्सीडेंट या खराब मेंटेनेंस की ओर इशारा करती है. सभी शीशों पर मौजूद एचिंग कोड एक जैसे होने चाहिए. टायर, ब्रेक और अंडरबॉडी भी ध्यान से चेक करें. क्योंकि इनकी मरम्मत महंगी पड़ सकती है.
ओनरशिप और डॉक्यूमेंट्स की जांच
अधिकतर लोग सिंगल-ओनर कार को प्रायोरिटी देते हैं. क्योंकि, गाड़ी का इस्तेमाल सिर्फ एक ही ओनर द्वारा किया जाता है, जिससे इसके यूज हिस्ट्री और डॉक्यूमेंटेशन को वेरिफाई करना आसान हो जाता है. ऐसे में पहले कन्फर्म करें कि RC में दर्ज नाम और पता सेलर के डिटेल्स से मैच हो रहा है या नहीं. गाड़ी के चेसिस और इंजन नंबर में भी कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए.
लीगल डॉक्यूमेंट्स और बकाया राशि
पुरानी गाड़ी खरीदने से पहले यह कन्फर्म करें कि कार के सभी लीगल डॉक्यूमेंट्स सही है. यह चेक करें कि गाड़ी में वैलिड इंश्योरेंस, अपडेटेड PUC और पूरा रोड टैक्स जमा हो. गाड़ी का किसी तरह का लोन, ट्रैफिक चालान या कानूनी केस पेंडिंग न हो. अगर कार लोन पर है या दूसरे राज्य में ट्रांसफर होनी है, तो NOC लेना जरूरी होता है.
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