एक जमाना था जब तमिलनाडु के मदुरै और तिरुनेलवेली की सड़कों पर धूल उड़ाती एक बस गुजरती थी, तो बुजुर्ग अपनी जेब से घड़ी निकालकर समय मिलाते थे. लोगों का कहना था- "सूरज भले ही उगने में 2 मिनट की देरी कर दे, लेकिन टी.वी. सुंदरम की बस कभी लेट नहीं हो सकती."
समय की इसी पाबंदी और भरोसे की नींव पर खड़ा हुआ भारत का एक ऐसा ऑटोमोबाइल घराना, जिसे आज पूरी दुनिया TVS Motor Company के नाम से जानती है. TVS- यह नाम कंपनी के फाउंडर टी. वी. सुंदरम अयंगर (T. V. Sundram Iyengar) के पूरे नाम के शुरुआती अक्षरों से लिया गया है.
आज TVS दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में गाड़ियां बेचती है. होसुर के इसके कारखानों में दुनिया की सबसे प्रीमियम मोटरसाइकिल कंपनी BMW की बाइक्स तैयार होती हैं. आज के प्रभात खबर एक्सप्लेनर में तसल्ली से समझेंगे कि कैसे एक बस चलाने वाली कंपनी ने भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर अपना परचम लहराया.
कौन थे टी.वी. सुंदरम अयंगर और उन्होंने बस कंपनी क्यों शुरू की?
कहानी शुरू होती है 20वीं सदी की शुरुआत में. तिरुकुरुंगुडी वेंकटागरुस्वामी सुंदरम अयंगर पेशे से वकील और बैंकर थे. वे चाहते तो एक सुरक्षित और आरामदायक जिंदगी जी सकते थे. लेकिन उनके भीतर एक ऐसा विजन था जो उस दौर के भारत में बहुत कम लोगों के पास था- 'मोबिलिटी का विजन'.
- 1911 में पहला कदम: उन्होंने नौकरी छोड़कर मदुरै में 'टी.वी. सुंदरम अयंगर एंड संस' की स्थापना की और 1913 में तमिलनाडु की पहली संगठित कमर्शियल बस सेवा शुरू की.
- भरोसे की पॉलिसी: सुंदरम अयंगर का मानना था कि अगर कोई बस रास्ते में खराब होती है, तो यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं बल्कि मुसाफिर के भरोसे का टूटना है. इसलिए उन्होंने अपनी इन-हाउस वर्कशॉप्स बनाईं, स्पेयर पार्ट्स की क्वालिटी पर काम किया और देखते ही देखते दक्षिण भारत में ट्रांसपोर्टेशन का दूसरा नाम TVS बन गया.
- दूसरे विश्व युद्ध की चुनौती: जब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पेट्रोल की भारी किल्लत हो गई, तो TVS ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी बसों को चलाने के लिए 'TVS गैस प्लांट' विकसित किया, जो कोयले की गैस से गाड़ियां दौड़ाता था. यह इनोवेशन ही TVS का असली DNA बन गया.
बस चलाने वाली कंपनी दोपहिया गाड़ियों में कैसे आई?
आजादी के बाद कंपनी ने ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और ब्रेक सिस्टम्स बनाने में महारत हासिल की. लेकिन 1970 के दशक के आखिर में कंपनी ने महसूस किया कि भारत के आम आदमी, छोटे दुकानदार और किसान को एक ऐसे साधन की जरूरत है जो साइकिल से तेज हो, लेकिन कार या बड़ी बुलेट जितना महंगा न हो. यहीं से जन्म हुआ TVS 50 का.
- 1980 में भारत का पहला 2-सीटर मोपेड: तमिलनाडु के होसुर में 1980 में जब 50cc का TVS 50 लॉन्च हुआ, तो यह देश का पहला 2-सीटर मोपेड था.
- दूधवाले से लेकर सब्जी व्यापारी तक की लाइफलाइन: TVS 50 इतना मजबूत और सस्ता था कि इस पर पीछे दो-तीन दूध की टंकियां लादें या बोरियां, यह हर उबड़-खाबड़ रास्ते पर निकल जाता था.
- आज का XL 100: यही TVS 50 आज मॉडर्न अवतार में 'TVS XL 100' बनकर देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बिकता है और कंपनी के सबसे बड़े वॉल्यूम ड्राइवर्स में से एक है.
सुजुकी के साथ क्या हुआ था और TVS ने 'अपाचे' से कैसे वापसी की?
1982 में जब भारत में जापानी कंपनियों की तकनीक का दौर शुरू हुआ, तो TVS ने जापान की मशहूर कंपनी सुजुकी (Suzuki Motor Corporation) के साथ हाथ मिलाया. नाम दिया गया- Ind-Suzuki.
इस पार्टनरशिप ने भारतीय सड़कों को 'Samurai' (नो प्रॉब्लम बाइक), 'Shogun' (द बॉस) और 'Fiero' जैसी लीजेंड्री बाइक्स दीं. लेकिन 2000 के आते-आते दोनों कंपनियों के बीच मैनेजमेंट और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद शुरू हो गए.
- 2001 का ऐतिहासिक अलगाव: 2001 में दोनों कंपनियों ने अपनी 19 साल पुरानी साझेदारी खत्म कर दी. ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स ने कयास लगाए कि जापानी तकनीक के बिना TVS बिखर जाएगी.
- वेणु श्रीनिवासन का मास्टरस्ट्रोक: कंपनी के तत्कालीन मुखिया वेणु श्रीनिवासन ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में भारी पैसा लगाया.
- TVS Racing का सीक्रेट फॉर्मूला: बहुत कम लोग जानते हैं कि TVS ने 1982 में ही देश की पहली फैक्ट्री रेसिंग टीम TVS Racing बना ली थी. जब सुजुकी से अलग होने के बाद खुद की बाइक बनाने की बारी आई, तो TVS ने अपने रेस ट्रैक के इंजीनियरों को सड़क की बाइक बनाने का जिम्मा सौंपा.
- 2006 में TVS Apache की एंट्री: कंपनी ने 'Track to Road' फिलॉसफी पर Apache लॉन्च की. शार्प डिजाइन, तेज पिकअप और रेसिंग थ्रॉटल ने युवाओं के सिर चढ़कर बोलना शुरू कर दिया. आज Apache RTR 160 से लेकर RR 310 तक, कंपनी हर महीने हजारों की संख्या में परफॉरमेंस बाइक्स बेचती है.
TVS के वो 5 गेमचेंजर प्रोडक्ट्स कौन-से हैं, जिन्होंने कंपनी की तकदीर बदली?
| प्रोडक्ट | लॉन्च वर्ष | क्या था खास? |
| TVS 50 | 1980 | देश का पहला टू-सीटर मोपेड, जिसने भारतीय मिडिल क्लास को पहिए दिए. |
| Scooty | 1994 | महिलाओं की मोबिलिटी को आजादी दी, भारत में 'स्कूटी' शब्द ही एक पूरी कैटेगरी का पर्याय बन गया. |
| Apache सीरीज | 2005 | सुजुकी से अलग होने के बाद TVS को 'स्पोर्ट्स बाइक किंग' बनाया. |
| Jupiter | 2013 | "ज्यादा का फायदा" टैगलाइन के साथ होंडा एक्टिवा के एकाधिकार को खुली टक्कर दी. |
| iQube | 2020 | फैमिली-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिक स्कूटर, जिसने स्टार्टअप्स की आंधी में भी 10 लाख ग्राहक जोड़े. |
BMW और Norton... विदेशी कंपनियों के साथ TVS का क्या गेमप्लान रहा?
TVS हमेशा से जानती थी कि सिर्फ घरेलू बाजार में कम्यूटर गाड़ियां बेचकर वो ग्लोबल लीडर नहीं बन सकती. इसके लिए उसने दो बड़े विदेशी दांव चले:
BMW Motorrad के साथ हाथ मिलाना (2013)
2013 में जब BMW ने एक किफायती सब-500cc बाइक बनाने की सोची, तो उसने चीन या किसी अन्य देश के बजाय TVS की इंजीनियरिंग पर भरोसा किया.
- दोनों ने मिलकर 310cc का सिंगल-सिलेंडर इंजन प्लेटफॉर्म तैयार किया.
- आज होसुर प्लांट में बनी BMW G 310 R, G 310 GS और G 310 RR पूरी दुनिया में बेची जाती हैं.
- इसी प्लेटफॉर्म पर TVS ने अपनी सुपरस्पोर्ट बाइक Apache RR 310 और स्ट्रीटफाइटर RTR 310 बनाई, जिसने TVS को प्रीमियम लीग में खड़ा कर दिया.
122 साल पुरानी ब्रिटिश कंपनी 'Norton' को खरीदना (2020)
अप्रैल 2020 में, जब पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही थी, TVS ने ब्रिटेन की दिवालिया हो चुकी ऐतिहासिक सुपरबाइक कंपनी Norton Motorcycles को करीब 153 करोड़ रुपये खरीद लिया.
- इस कदम से TVS के पास 650cc से लेकर 1200cc तक की पैरेलेल-ट्विन और V4 सुपरबाइक्स बनाने की लीगेसी और पेटेंट्स आ गए.
- TVS अब नॉर्टन को ब्रिटेन के सोलिहुल में एक हाई-टेक फैक्ट्री के जरिए दोबारा खड़ा कर रही है, ताकि ट्रायम्फ और रॉयल एनफील्ड जैसी कंपनियों को ग्लोबल लेवल पर चुनौती दी जा सके.
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की रेस में TVS इतनी तेजी से आगे कैसे निकली?
जब देश में ओला (Ola) और एथर (Ather) जैसे नए स्टार्टअप्स अरबों की फंडिंग लेकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में कूद रहे थे, तब कई पुरानी कंपनियों के कदम डगमगाए. लेकिन TVS ने धीमा मगर बेहद मजबूत दांव चला.
- रोड-टेस्टेड भरोसा: TVS ने अपनी iQube को बहुत ज्यादा फैंसी गैजेट बनाने के बजाय एक पक्का, मजबूत और सुरक्षित फैमिली स्कूटर बनाया. जिसमें न आग लगने का डर था और न ही चलते-चलते रुकने की झंझट.
- 1 मिलियन का माइलस्टोन: इसी भरोसे का नतीजा है कि हाल ही में TVS iQube ने भारत में 10 लाख (1 मिलियन) ग्राहकों का आंकड़ा पार कर लिया है.
- अगस्त 2026 में 137% की बंपर ग्रोथ: आंकड़ों की बात करें तो अगस्त 2026 में TVS की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिक्री में साल-दर-साल (YoY) 137% का भारी उछाल दर्ज किया गया. बड़े बैटरी पैक (iQube ST) और अलग-अलग बजट रेंज ने इसे देश के कोने-कोने में पहुंचा दिया है.
टाइमलाइन: 1911 से 2026 तक TVS का सफर
- 1911: टी.वी. सुंदरम अयंगर ने मदुरै में बस सेवा कंपनी की स्थापना की.
- 1962: ब्रिटेन के लुकास के साथ मिलकर ऑटो पार्ट्स (Lucas-TVS) बनाना शुरू किया.
- 1980: भारत का पहला 2-सीटर मोपेड 'TVS 50' लॉन्च हुआ.
- 1982: TVS Racing की स्थापना और सुजुकी के साथ ऐतिहासिक करार.
- 1994: महिलाओं के लिए भारत का आइकॉनिक स्कूटर 'TVS Scooty' लॉन्च.
- 2001: सुजुकी से अलग होकर स्वतंत्र 'TVS Motor Company' बनी.
- 2006: परफॉरमेंस सेगमेंट में तहलका मचाने वाली 'TVS Apache' आई.
- 2013: जर्मन दिग्गज BMW Motorrad के साथ ग्लोबल पार्टनरशिप.
- 2020: ब्रिटिश सुपरबाइक ब्रांड 'Norton Motorcycles' का अधिग्रहण और इलेक्ट्रिक स्कूटर 'iQube' की लॉन्चिंग.
- 2026: iQube के 10 लाख ग्राहक पूरे, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में 137% की सालाना ग्रोथ.
TVS की कहां गाड़ियां बनती हैं और विदेशों में इनका कितना दबदबा है?
अगर आपको लगता है कि TVS सिर्फ एक भारतीय कंपनी बनकर रह गई है, तो आपको इसके एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़े देखने चाहिए. एक्सपोर्ट अब TVS की ग्रोथ स्ट्रेटेजी का सबसे अहम हिस्सा है.
कंपनी आज एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मिडिल ईस्ट और यूरोप सहित दुनिया के कई बड़े बाजारों में मजबूती से खड़ी है.
- वित्तीय वर्ष (FY) 2024-25 में कंपनी के कुल रेवेन्यू में एक्सपोर्ट का योगदान 24% था.
- FY 2025-26 में इंटरनेशनल बिजनेस में और तेजी आई, तीसरी तिमाही (Q3) में 4.10 लाख यूनिट्स निर्यात किए गए और चौथी तिमाही (Q4) में एक्सपोर्ट का रिकॉर्ड मोमेंटम दर्ज किया गया.
कहां हैं TVS के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट?
आज कंपनी के पास कुल 4 अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं:
• भारत में तीन: होसुर (तमिलनाडु), मैसूर (कर्नाटक), और नालागढ़ (हिमाचल प्रदेश).
• विदेश में एक: करावांग (इंडोनेशिया). इंडोनेशिया ऑपरेशंस ने तो हाल ही में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 10 लाख यूनिट्स के प्रोडक्शन का बड़ा माइलस्टोन पार किया है.
115 साल का सफर तो हो गया... अब अगला पड़ाव क्या है?
अब TVS की कहानी सिर्फ "भारत में ज्यादा बाइक बेचने" तक सीमित नहीं है. कंपनी की अगली रणनीति 5 मजबूत पिलर्स पर खड़ी है:
- प्रीमियम मोटरसाइकिल्स
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
- कमर्शियल थ्री-व्हीलर्स
- ग्लोबल एक्सपेंशन
- टेक्नोलॉजी
भविष्य की बड़ी तैयारियां:
- नॉर्टन पर बड़ा दांव: ब्रिटिश ब्रांड 'Norton' को वापस दुनिया का सिरमौर बनाने के लिए TVS कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है. कंपनी इस पर अब तक 200 मिलियन पाउंड से ज्यादा का भारी-भरकम निवेश कर चुकी है.
- ·BMW के साथ फोकस: BMW Motorrad के साथ मिलकर 500cc से कम इंजन (Sub-500cc) वाली और भी प्रीमियम बाइक्स विकसित की जा रही हैं.
- ·R&D और AI: TVS अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सप्लाई चेन और कस्टमर एक्सपीरियंस सुधारने में कर रही है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही कंपनी ने रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर सालाना ₹1,254 करोड़ खर्च किए हैं, जिसके पीछे 2,000 से ज्यादा इंजीनियर्स की फौज दिन-रात काम कर रही है.
