ChatGPT Google Bard WhatsApp: डिजिटल जगत के गुरुओं पर आंख बंद कर भरोसा करना कितना सही? Teacher’s Day पर जानें

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ChatGPT Google Bard WhatsApp: डिजिटल जगत के गुरुओं पर आंख बंद कर भरोसा करना कितना सही? Teacher’s Day पर जानें

ChatGPT Bard Google WhatsApp As Teachers – आज की फास्ट लाइफ में हम इतना रम गए हैं कि हमें सब कुछ इंस्टैंट चाहिए. इंटरनेट के जमाने में गुरु का भी महत्व कम हो रहा है. तुरंत जानने के लिए लोग इंटरनेट पर कुछ भी सर्च कर उसका जवाब तलाश लेते हैं. लेकिन यहां मिलनेवाली जानकारी कितनी सही होती है? आइए जानें-

ChatGPT Bard Google WhatsApp As Teachers: आज टीचर्स डे है, यानी शिक्षक दिवस. हमारी सनातन संस्कृति में एक कहावत प्रचलित है- गुरु बिन ज्ञान कहां. मतलब यह कि हमारे जीवन में शिक्षक की जगह कोई नहीं ले सकता है.

लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम इतना रम गए हैं कि हमें सब कुछ इंस्टैंट चाहिए होता है. इंटरनेट के जमाने में गुरु का महत्व शायद कम होने लगा है. इंस्टैंट जानकारी के चक्कर में लोग इंटरनेट पर कुछ भी सर्च कर उसका जवाब तलाश लेते हैं.

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यहां ध्यान रखनेवाली बात यह है कि इंटरनेट पर दी गई हर जानकारी जरूरी नहीं कि हर बार सही ही हो. इंटरनेट के इस दौर में गूगल और व्हाट्सऐप जानकारी के सबसे बड़े स्रोत हैं. वहीं, पिछले कुछ दिनों में तो चैटजीपीटी का इतना हल्ला मचा है कि लोग इससे हर तरह के सवाल पूछने लगे हैं. लेकिन इनकी इंफॉर्मेशन कितनी सही होती है? आइए जानते हैं-

गूगल गुरु का ज्ञान जांच-परख लेना जरूरी

डिजिटल दुनिया में गूगल बाबा सबसे पॉपुलर हैं. यह गुरु ही नहीं, बल्कि ज्ञान की खान है. बस एक क्लिक पर आपको अपने सवाल का जवाब फौरन मिल जाता है. लेकिन जहां इस गुरु से ज्ञान प्राप्त करना आसान है, वहीं इससे प्राप्त ज्ञान हमेशा सही नहीं होता. गूगल से मिली जानकारी की सत्यता को किसी और माध्यम से जांच करना जरूरी है.

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व्हाट्सऐप गुरु भी भरोसेमंद नहीं

गूगल गुरु से भी तेजी से व्हाट्सऐप गुरु सुबह से रात तक ज्ञान बांटते रहते हैं. इसके जरिये बिन मांगे ज्ञान की बरसात होती रहती है. गुड मॉर्निंग, गुड नाइट मैसेज के अलावा, जोक्स, बीमारी के नुस्खे, सामाजिक आर्थिक मानसिक परेशानियों के हल. क्या कुछ नहीं मिलता यहां पर? कभी कोई चमत्कार, तो कभी धर्म की भड़काऊ बातें हमारे फोन तक पहुंचती हैं. इन सारी चीजों पर किसी फैसले तक पहुंचने से पहले हमें अपना दिमाग जरूर लगा लेना चाहिए.

ChatGPT – Bard के जवाब भी री-चेक कर लें

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित चैटजीपीटी और बार्ड जैसे चैटबॉट्स इन दिनों धड़ल्ले से यूज किये जा रहे हैं. लोग इसे छोटे मोटे सवालों के जवाब जानने के साथ ही कविताएं और थीसिस तक लिखवा ले रहे हैं. लेकिन इन प्लैटफॉर्म्स पर जाकर सवालों के जवाब ढूंढने के बाद उसपर भरोसा करने से पहले अपनी अक्ल लगानी भी जरूरी है. इनसे आउटपुट में जो भी कंटेंट आपके सामने आये, उसे एक बार क्रॉस चेक जरूर कर लेना चाहिए, नहीं तो लेने के देने पड़ सकते हैं.

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By Rajeev kumar

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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