नई कार खरीदना हर किसी का सपना होता है. लेकिन क्या हो जब नई कार ही परेशानी का सबब बन जाए? ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है. जहां एक नई 'Tata Harrier EV' में बार-बार खराबी आ रही थी.
ग्राहक ने परेशान होकर इसकी शिकायत कंज्यूमर कोर्ट में कर दी. अब कोर्ट ने डीलर को कार वापस लेने और पैसे रिफंड करने का आदेश दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
कुछ ही दिनों में शुरू हो गई परेशानी
यह मामला हैदराबाद का है. यहां 'रेफ्रिजरेशन इक्विपमेंट एंड सॉल्यूशंस' के पार्टनर पवन बागरीचा ने 'टाटा सेलेक्ट मोटर्स' से एक नई कार खरीदी थी. उन्होंने 1 अगस्त 2025 को Tata Harrier EV (Empowered + 75 APC) मॉडल लिया था.
इस कार की कीमत 27.98 लाख रुपये थी, जिसे लोन पर लिया गया था. लेकिन डिलीवरी के कुछ ही दिनों बाद कार में दिक्कतें शुरू हो गईं. कार के स्मार्ट-की (Smart-Key) और सेंट्रल लॉकिंग में समस्या आने लगी.
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बीच रास्ते में बंद हो जाती थी कार
शिकायत के मुताबिक, कार को स्टार्ट करने में बार-बार परेशानी हो रही थी. कई बार तो ऐसा हुआ कि कार बीच रास्ते में ही बंद हो गई. एक महीने के अंदर ही ऐसी समस्या चार बार सामने आई. ग्राहक का आरोप था कि बार-बार रिपेयरिंग के बाद भी कार ठीक नहीं हुई. परेशान होकर ग्राहक ने डीलर से कार बदलने और मुआवजे की मांग की.
डीलर ने क्या दी सफाई?
इस मामले में डीलर ने अपनी सर्विस में किसी भी तरह की कमी से इनकार किया. डीलर का कहना था कि शुरुआत में सॉफ्टवेयर की दिक्कत थी, जिसे अपडेट के जरिए सुलझा दिया गया था. डीलर ने यह भी तर्क दिया कि ग्राहक के पास किसी ऑटोमोबाइल इंजीनियर की रिपोर्ट नहीं है.
इसलिए इसे मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं माना जा सकता. डीलर ने कहा कि वह सिर्फ सर्विस सेंटर है और कार बनाने वाली कंपनी को इस केस में पार्टी नहीं बनाया गया है.
कंज्यूमर कोर्ट ने क्या कहा?
हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने इस पूरे मामले की जांच की. कोर्ट ने सर्विस हिस्ट्री, जॉब कार्ड और दोनों पक्षों के बीच हुई चैट्स को देखा. इसमें साफ हुआ कि ग्राहक ने कार खरीदने के कुछ दिन बाद ही समस्या की शिकायत की थी.
रिकॉर्ड से यह भी साबित हुआ कि कार सच में बीच रास्ते में रुकी थी. कोर्ट ने कहा कि जब जॉब कार्ड और चैट से समस्या साबित हो रही है, तो इसके लिए किसी एक्सपर्ट रिपोर्ट की जरूरत नहीं है.
45 दिन के अंदर लौटाने होंगे पैसे
कंज्यूमर कोर्ट ने 7 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने डीलर को कार वापस लेने का आदेश दिया है. डीलर को कार की कुल कीमत में से 10 प्रतिशत डेप्रिसिएशन काटकर बाकी रकम रिफंड करनी होगी. इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए ग्राहक को 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
कानूनी खर्च के रूप में भी 15,000 रुपये देने का आदेश दिया गया है. डीलर को यह पूरी रकम 45 दिन के अंदर लौटानी होगी. अगर डीलर ऐसा नहीं करता है, तो उसे 9 प्रतिशत का सालाना ब्याज भी देना होगा.
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