Super Moon 2020: धरती के सबसे करीब नजर आये चंदा मामा, घटेगा कोरोना का कहर

super pink moon april 2020 date and time supermoon 2020 timings in India supermoon 2020 live streaming how and when to watch super pink full moon in India आज धरती ने सुपरमून का दीदार किया. आज रात आसमान में साल का सबसे बड़ा चांद दिखाई दिया. खास बात यह रही कि इसके दीदार के लिए लोगों को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी. लोगों ने अपनी छत और बालकनी से सुपरमून का दीदार किया. हालांकि कई जगहों पर आसमान साफ न होने की वजह से कई लोगों को मायूस भी होना पड़ा.

Super Pink Moon April 2020 Date and Time, Supermoon 2020 Timings in India, Supermoon 2020 Live Streaming, How and When to Watch Super Pink Full Moon in India : पूर्णिमा का चंद्रमा यूं तो हमेशा ही अद्भुत लगता है, लेकिन इस बार यह नजारा और भी खास रहा, क्योंकि इस बार पूर्णिमा अपने साथ सुपर मून लेकर आयी.

जी हां, आज धरती ने सुपरमून का दीदार किया. मंगलवार की रात आसमान में साल का सबसे बड़ा चांद नजर आया. कई जगहों से तसवीरें आ रही हैं, जिसमें लोगों ने वर्ष 2020 का सबसे बड़ा और सबसे चमकदार चांद का दीदार किया.

बताते चलें कि जब चांद और धरती के बीच की दूरी सबसे कम हो जाती है और चंद्रमा की चमक बढ़ जाती है, उस स्थिति में चांद को सुपरमून (Supermoon) कहा जाता है. इस दौरान चांद आम दिनों की तुलना में 14 प्रतिशत ज्यादा बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकीला दिखाई देता है.

7 अप्रैल की रात 11:38 पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे ज्यादा नजदीक नजर आया. इस समय पर चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी मात्र 356900 किलोमीटर रह गयी थी. चांद की यह स्थिति पेरिगी (perigee) कहलाती है.

आमतौर पर पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384400 किमी मानी जाती है. वहीं, चंद्रमा की पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी होने पर यह दूरी लगभग 405696 किमी मानी जाती है जिसे अपोगी (apogee) की स्थिति कहते हैं. चंद्रमा की पेरिगी की स्थिति में पूर्णिमा पड़ जाए, तो हमें सुपरमून दिखाई देता है. एक साल में न्यूनतम 12 पूर्णिमा पड़ती है, लेकिन ऐसा कम होता है कि पेरिगी की स्थिति में पूर्णिमा भी पड़े.

आकाश में सुपरमून आठ अप्रैल को अपने चरम पर दिखेगा, जिसका नाम पिंक सुपर मून है. सुपरमून 8 अप्रैल को दोपहर 2:35 बजे जीएमटी (भारतीय समयानुसार सुबह 8:05 बजे) पर दिखाई देगा. मगर, तब तक सूर्योदय हो चुका होगा और इस स्थिति में भारत के लोग सुपर पिंक मून की घटना को सीधे नहीं देख पाएंगे. लेकिन आप इस खास खगोलीय घटना को ऑनलाइन लाइव देख सकेंगे. Slooh इस सुपरमून की घटना को अपने YouTube चैनल पर लाइव स्ट्रीम करेगा.

बता दें कि पिंक सुपरमून सिर्फ एक नाम है, जिसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है. इसका मतलब ये नहीं है कि चांद गुलाबी रंग का दिखेगा. दरअसल, अमेरिका और कनाडा में इस मौसम में उगने वाले एक फूल की वजह से इसे पिंक सुपरमून कहा जाता है. इस फूल का नाम है- फ्लॉक्स सुबुलता (Phlox Subulata). इसे मॉस पिंक भी कहते हैं. इसके नाम पर ही इस सीजन में दिखने वाले सुपरमून को पिंक सुपरमून कहा गया है.

इस समय जब कोरोनावायरस (Coronavirus) के चलते देश भर में लॉकडाउन (Lockdown) है और ऐसे में हर गुजरते दिन के साथ हम सब यही उम्‍मीद कर रहे हैं कि जल्‍दी से ये सब खत्‍म हो और हम वापस अपनी जिंदगी को पहले की तरह जी सकें. ऐसे में सुपरमून एक उम्मीद लेकर आ रहा है, क्योंकि ज्योतिर्विज्ञान के जानकारों की मानें तो पृथ्वी पर स्थित समस्त औषधियां चंद्रमा से ऊर्जा प्राप्त करती हैं. यही वजह है कि चंद्रमा को औषधिपति कहा जाता है. शुक्ल पक्ष के आरंभ के साथ क्रमश: चंद्रमा का बल बढ़ता जाता है.

पूर्णमासी को चंद्रमा सर्वाधिक प्रभावशाली हो जाता है. सुपरमून की स्थिति में चंद्रमा पूर्णमासी से भी अधिक बलशाली होते हैं. ऐसे में कोरोना पर भी चंद्रमा की सुपरमून अवस्था का प्रभाव पड़ेगा. इसके साथ ही, 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में जायेंगे तब कोरोना की स्थिति में नियंत्रण होना शुरू हो जाएगा. 14 मई को सूर्य वृष राशि में गोचर करेंगे. वृष राशि स्थिर राशि होती है, इसलिए माना जा रहा है कि 14 मई को कोरोना का प्रकोप भारत में रुक जाएगा.

बहरहाल, कोविड-19 के चलते हालात पहले जैसे नहीं हैं. ऐसे में हमारी आपसे यही अपील है कि आप घर से बाहर न निकलें और जहां आप इस वक्त रहते हैं, वहीं की छत या बाल्‍कनी से ही इस चांद का दीदार करें. साथ ही सोशल डिस्‍टेंसिंग का भी पूरा खयाल रखें.

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Author: Rajeev Kumar

Published by: Prabhat Khabar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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