Sedan vs SUV: माइलेज के मामले में कौन सी कार है आगे? खरीदने से पहले जान लें जरूरी बातें

Sedan vs SUV: भारत में लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों ने कार खरीदने वालों के लिए माइलेज को सबसे बड़ा फैक्टर बना दिया है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि सेडान और SUV में से कौन-सी कार ज्यादा माइलेज देती है, ताकि गाड़ी खरीदते वक्त किसी तरह की उलझन न रहे. आइए आपको डिटेल में बताते हैं.

Sedan vs SUV: अगर आप कारों की दुनिया में अभी नए हैं और अक्सर सोचते हैं कि सेडान और SUV में से कौन ज्यादा माइलेज देती है, तो आपके मन में उठ रहा ये सवाल आज हम दूर कर देंगे. आगे बढ़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर माइलेज होती क्या है?

माइलेज का मतलब होता है कि एक कार एक लीटर पेट्रोल या डीजल में कितने किलोमीटर चल सकती है. भारत में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की वजह से ज्यादातर खरीदारों के लिए माइलेज बहुत बड़ा फैक्टर बन गया है. आइए अब आपको बताते हैं सेडान और SUV में से कौन ज्यादा माइलेज देती है और क्यों.

Sedan vs SUV: माइलेज का फर्क

आमतौर पर सेडान कारें SUV के मुकाबले ज्यादा माइलेज देती हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सेडान हल्की होती हैं, जमीन के ज्यादा पास होती हैं और उनकी बनावट ऐसी होती है कि हवा का कम रुकावट होती है. इससे उन्हें चलने में कम फ्यूल लगता है.

वहीं दूसरी तरफ, SUV साइज में बड़ी, ऊंची और भारी होती हैं, जिससे इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और नतीजा यह होता है कि फ्यूल की खपत ज्यादा हो जाती है.

सेडान कारें ज्यादा माइलेज क्यों देती हैं?

सेडान कारों का बॉडी वजन SUV के मुकाबले कम होता है. हल्की गाड़ी होने की वजह से इंजन पर ज्यादा लोड नहीं पड़ता, खासकर शहर की ट्रैफिक में, जिससे फ्यूल कम खर्च होता है. सेडान का डिजाइन नीचे और स्लिम होता है, जिससे हवा आसानी से कट जाती है. हाईवे पर चलते समय हवा का दबाव कम पड़ता है और माइलेज बेहतर मिलता है. ज्यादातर सेडान में छोटे लेकिन किफायती इंजन होते हैं, जो रोजमर्रा की स्मूद ड्राइविंग के लिए बनाए जाते हैं, न कि ऑफ-रोडिंग के लिए.

इन्हीं वजहों से भारत में पेट्रोल सेडान आमतौर पर 15-20 km/l तक का माइलेज देती हैं, जबकि डीजल सेडान असली चलाने की स्थिति में 21-22 km/l तक भी चल जाती हैं.

SUV कारें काम माइलेज क्यों देती हैं?

SUV गाड़ियां कई वजहों से लोगों को पसंद आती हैं, लेकिन माइलेज के मामले में ये आमतौर पर पीछे रह जाती हैं. इसकी वजह यह है कि इनमें ज्यादा मजबूत और भारी मटेरियल का इस्तेमाल होता है, जिससे गाड़ी का वजन बढ़ जाता है. इनका ऊंचा और चौड़ा डिजाइन हवा को ज्यादा काटता है, जिससे फ्यूल की खपत भी बढ़ जाती है. इसके अलावा बड़े इंजन, चौड़े टायर और कई बार ऑल-व्हील ड्राइव सिस्टम भी पेट्रोल-डीजल ज्यादा खर्च करवाते हैं. 

यही कारण है कि ज्यादातर पेट्रोल SUV लगभग 10 से 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती हैं, जबकि डीजल SUV मॉडल के हिसाब से थोड़ा बेहतर माइलेज दे सकती हैं.

हाइब्रिड SUV की अलग कहानी

वहीं बात करें हाइब्रिड SUV की तो थोड़ी अलग फैक्ट्स देखने को मिलता है. Maruti Grand Vitara जैसी हाइब्रिड SUV करीब 28 km/l तक का माइलेज दे सकती हैं, जो कई सेडान कारों से भी बेहतर है. आम तौर पर ज्यादातर सेडान कारें 15-20 km/l का माइलेज देती हैं, जबकि बिना हाइब्रिड टेक्नोलॉजी वाली SUV का माइलेज अक्सर 10-15 km/l के आसपास ही रहता है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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