अब कारों की सुरक्षा होगी और भी मजबूत, 2027 में आएगा Bharat NCAP 2.0, नितिन गडकरी ने बताया पूरा प्लान

भारत में कारों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भारत NCAP 2.0 की घोषणा की है, जो 2027 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है. इस नए चरण में यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, भारत NCAP ने देश में वाहनों के सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है और भारतीय गाड़ियों को दुनिया भर में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद की है. SIAM के 66वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि देश के कार सुरक्षा असेसमेंट कार्यक्रम का अगला चरण, भारत NCAP 2.0, साल 2027 के अंत तक शुरू करने की योजना है.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय गाड़ियों की बढ़ती क्रेडिट 

गडकरी ने बताया कि एक्सपोर्ट मार्केट में भारत को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में ईमानदारी, विश्वसनीयता और साख सबसे कीमती संपत्तियों में से हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय ऑटोमोटिव उत्पादों की धारणा और वैल्यू में काफी सुधार हुआ है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है.

भारत NCAP की सफलता और कम लागत का फायदा

गडकरी ने भारत NCAP को एक सफल पहल बताते हुए इसका क्रेडिट ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के सहयोग को दिया. उन्होंने बताया कि भारत NCAP को हाल ही में मोरक्को में एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है और इस प्रोग्राम के तहत अब तक 30 से ज्यादा गाड़ियों की टेस्टिंग की जा चुकी है.

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ग्लोबल NCAP के मुकाबले काफी सस्ता टेस्टिंग खर्च

मंत्री ने लोकल स्तर पर टेस्टिंग के वित्तीय फायदों को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि ग्लोबल NCAP के जरिए किसी मॉडल की जांच कराने में लगभग 2.5 करोड़ रुपये का खर्च आता है, जबकि भारत NCAP में प्रति मॉडल केवल 16 लाख रुपये का खर्च बैठता है, जिससे यह वाहन निर्माताओं के लिए काफी किफायती साबित हो रहा है.

भारत NCAP 2.0 की तैयारी और प्रमुख टारगेट 

गडकरी ने कहा कि सरकार भारत NCAP 2.0 को आगे बढ़ा रही है, जिसे अक्टूबर 2027 से लागू करने का शेड्यूल तय किया गया है. यह देश में सड़क सुरक्षा में सुधार लाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है.

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सड़क दुर्घटनाओं की चुनौती और 4 प्रमुख पिलर्स

समस्या की गंभीरता को बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है, जो एक बड़ी राष्ट्रीय चिंता का विषय है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत NCAP के अगले चरण में चार मुख्य बातों पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें क्रैश एवॉयडेंस (हादसा रोकना), ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन (यात्रियों की सुरक्षा), पेडेस्ट्रियन सेफ्टी (पैदल चलने वालों की सुरक्षा) और पोस्ट-क्रैश केयर (हादसे के बाद की देखभाल) शामिल हैं.

गडकरी ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने और समग्र सुरक्षा मानकों को सुधारने के लिए सरकार और ऑटो इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल का एक्शन लिया.

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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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