ये गलतियां हैं आपकी गाड़ी के माइलेज की दुश्मन, अभी सुधार लेंगे तो फायदे में रहेंगे

क्या आपकी बाइक या स्कूटर का माइलेज लगातार कम हो रहा है? यह जरूरी नहीं कि इंजन खराब हो. टायर प्रेशर, एयर फिल्टर, इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग जैसी छोटी चीजें भी माइलेज पर असर डालती हैं. अपनी राइडिंग आदतों में सुधार करके आप ईंधन की बचत कर सकते हैं.

भले ही आप बाइक चलाने का शौक रखते हों, लेकिन जब बात माइलेज की आती है तब एक टेंशन दिमाग में जरूर रहता है. आप हीरो स्पलेंडर, होंडा एक्टिवा, टीवीएस जुपिटर, बजाज प्लसर और रॉयल एनफील्ड जैसी बाइकें रखते हैं, तो उनके माइलेज को लेकर कंफ्यूज होना लाजमी है. अगर आपकी गाड़ी का माइलेज कम हो रहा है या हो गया है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि उसका इंजन खराब है. कई मामलों में कुछ ईजी जांच और बेहतर ड्राइविंग आदतों से माइलेज में सुधार किया जा सकता है. आइए इसके बारे में जानते हैं. 

मोटरसाइकिल या स्कूटर का माइलेज कम क्यों हो रहा है? 

आपकी बाइक या स्कूटर का माइलेज कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. टायरों में हवा कम होना लो फ्यूल एफिशिएंसी की मुख्य वजह है. इसके अलावा गंदे एयर फिल्टर, पुराना इंजन ऑयल, घिसे हुए स्पार्क प्लग या समय पर सर्विसिंग न करवाना भी कम माइलेज का कारण है. बाइकों में ढीली या सूखी हुई चेन घर्षण बढ़ा सकती है और ईंधन की खपत को कम कर सकती है. यदि आप अग्रेसीव तरीके से बाइक राइड करते हैं या ओवरलोड लेकर चलते हैं तो इससे भी माइलेज पर असर होता है.

मोटरसाइकिल या स्कूटर का माइलेज कैसे बढ़ेगा?

यदि आपकी बाइक या स्कूटर का माइलेज कम हो रहा है तो उसकी नियमित सर्विसिंग करवानी चाहिए. टायरों में एयर प्रेशर को बैलेंस करके रखें और कंपनी द्वारा बताए गए इंजन ऑयल का ही इस्तेमाल करें. इसके अलावा एयर फिल्टर और स्पार्क प्लग को समय-समय पर चेंज करते रहें और इसकी चेन को लगातार साफ और ल्यूब्रिकेंट्स करवाते रहें. 

क्या राइडिंग स्टाइल से भी फ्यूल एफिशिएंसी कम होती है?

हां, यदि आप अपनी बाइक को अग्रेसीव अंदाज में चलाते हैं, तेजी से एक्सलरेट करते हैं, अचानक ब्रेक मारते हैं या बिना मतलब के इंजन को ज्यादा रेव करते हैं तो इससे फ्यूल एफिशिएंसी कम होती है. हमेशा स्थिर गति से बाइक चलाएं और गियर को चेंज करें, जिससे फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर होगी. इसके अलावा इंजन को भी बेवजह चालू करके न रखें.

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क्या E20 पेट्रोल से माइलेज घटता है?

E20 पेट्रोल में 20 पर्सेंट एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल रहता है. एथेनॉल की ऊर्जा पेट्रोल के मुकाबले कम होती है, इसलिए राइडर्स को फ्यूल एफिशिएंसी में थोड़ी कमी महसूस होती है. हालांकि, E20 वाले टू-व्हीलर्स में यह अंतर आमतौर पर बहुत ज्यादा नहीं है.

 क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है?

कुछ बाइक मालिकों को ऐसा लगता है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो सकता है. पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय, हेवी इंडस्ट्रीज और सड़क परिवहन एंड राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया, जिसमें हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य बिजनेस अधिकारी आशुतोष शर्मा ने कहा कि कंपनी ने व्यापक सेवा डेटा का एनालिसिस किया और यह पाया कि पहले के ईंधनों की तुलना में E20 पर चलने वाले वाहनों में इंजन खराब होने की समस्या ज्यादा नहीं है.

अच्छे माइलेज वाले बाइक्स एंड स्कूटर्स 

यदि आपको एक अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी वाली बाइक चाहिए तो हीरो स्पलेंडर, एचएफ डीलक्स, बजाज प्लैटिना और होंडा शाइन को पहली पसंद बना सकते हैं. वहीं, स्कूटर्स में होंडा एक्टिवा, टीवीएस जुपिटर और सुजुकी एक्सेस एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Shivansh Shekhar

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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