इंदौर के ब्रजेश्वरी एनएक्स इलाके में हुए भीषण अग्निकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. डिजिटल डेटा और मौके पर हुई तकनीकी पड़ताल से साफ हो गया है कि आग की शुरुआत बिजली के खंभे से नहीं, बल्कि चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक कार से हुई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरचार्जिंग के चलते बैटरी बम की तरह फटी और धमाका हुआ.
डिजिटल डेटा ने खोला सच
बिजली कंपनी ने स्मार्ट मीटर और ट्रांसफाॅर्मर से मिले तीन महीने के मिनट-टू-मिनट डेटा का विश्लेषण किया. इसमें पाया गया कि हादसे की रात कार रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक लगातार चार्जिंग पर थी. तड़के चार्जिंग के दौरान ऑटो कट-ऑफ हुआ, लेकिन आधे घंटे बाद सप्लाई फिर शुरू हो गई और इसी दौरान जोरदार ब्लास्ट हुआ.
जांच में क्या मिला?
फायर सेफ्टी विशेषज्ञों और बिजली विभाग की टीम ने करीब पांच घंटे तक मौके की छानबीन की. कार के जले हुए पुर्जे, इलेक्ट्रिक बोर्ड, वायरिंग और सीट के हिस्सों की जांच की गई. पिछला पहिया और जले हुए हिस्से बैटरी विस्फोट की ओर इशारा कर रहे थे. विशेषज्ञों ने यह भी माना कि इलेक्ट्रिक बोर्ड के सॉकेट में शॉर्ट सर्किट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
परिवार का दावा और तकनीकी पड़ताल
उद्योगपति मनोज पुगलिया के बेटे सौरभ ने दावा किया था कि कार में चार्जर लगा ही नहीं था और आग बिजली के खंभे से निकली चिंगारी से लगी. लेकिन डिजिटल डेटा और मौके की जांच ने इस दावे को खारिज कर दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, घर पर 15 किलोवाट का स्वीकृत लोड था और कार चार्जिंग शुरू होते ही कुल खपत नौ किलोवाट तक पहुंच जाती थी.
EV सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
हालांकि, कुछ और निष्कर्षों के साथ आधिकारिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है. इस हादसे ने एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगातार चार्जिंग, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता और ओवरलोडिंग जैसी स्थितियां EVयूजर्स के लिए खतरे का संकेत हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी तकनीक और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे फिर हो सकते हैं.
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