बारिश में टायरों के लिए अपनाएं ये 5 बेस्ट ट्रिक्स, मिलेगी स्मूद राइडिंग एक्सपिरियंस

बरसात में कार चलाना सिरदर्द बन सकता है. खासकर टायरों की देखभाल महत्वपूर्ण हो जाती है. इस लेख में हम आपको बताएंगे कि बारिश के मौसम में अपनी कार के टायरों की देखभाल कैसे करें और सुरक्षित ड्राइविंग का अनुभव कैसे पाएं.

बरसात का मौसम गाड़ी चालकों के लिए एक सिरदर्द होता है. लगातार या रुक-रुककर बारिश होने के चलते सड़कों पर पानी आ जाता है. ऐसे में ड्राइव करना आसान नहीं होता. मानसून में गाड़ी की टायरों का एक्स्ट्रा ध्यान देना जरूरी होता है. खराब या पंचर टायर से फिसलने का खतरा बढ़ जाता है. मानसून की बारिश सड़कों में नमी भर देता है, जिसके चलते वाहन के फिसलने के चांसेज बढ़ जाते हैं. ऐसे में टायर्स का देखभाल करना जरूरी है. चलिए आज हम बताते हैं कि गाड़ी चलाते समय कैसे सेफ रह सकते हैं. 

समय पर टायर्स को चेंज करना जरूरी 

मानसून के सीजन में अधिक बारिश के चलते ज्यादातर टायरों में परेशानी बढ़ने लगती है. इससे पहले की कोई दुर्घटना हो, टायरों को हर 5 हजार और 8 हजार किमी पर बदल जरूरी है. ऐसा करने से सामान्य घिसाई सही होती है. टायर्स की लाइफ वैल्यू भी बढ़ती है. खासकर मानसून में राइडिंग या ड्राइविंग के दौरान होने वाले खतरे कम हो जाते हैं.

सभी टायर्स ट्रेड की गहराई जांचें 

अगर आप बारिश में रोड पर गाड़ी लेकर निकल रहे हैं, तो सबसे पहले एक बार टायर ट्रेड की गहराई जरूर जांच लें. घिसा हुआ ट्रेड जब गीली सड़क पर जाती है, तो ग्रिप को कमजोर कर करती है. ऐसे कंडीशन में हाइड्रोप्लानिंग का खतरा बढ़ जाता है. ट्रेड का काम गहराई को न्यूनतम ट्रेड वियर इंडिकेटर (TWI) स्तर को मेंटेन रखना होता है.

व्हील्स का एलाइनमेंट जरूरी 

बरसात के समय में गाड़ी के व्हील्स की समय-समय पर जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है. कई बार डिसबैलेंसड व्हील्स के चलते असमान टायर रब और खराब हैंडलिंग हो सकती है. पानी वाले सड़कों पर यह ज्यादातर देखने को मिलता है. ऐसे में पहियों का सही एलाइनमेंट की जांच करना जरूरी है. अच्छी बैलेंसिंग होने पर टायरों की कंपन कम होती है और स्मूद ड्राइविंग एक्सपिरियंस मिलता है.

सभी टायर्स प्रेशर का मेंटेनेंस जरूरी 

बरसात होने पर गीली सड़क की वजह से अक्सर रोड एक्सीडेंट की संभावना बढ़ जाती है. इसके पीछे गाड़ी के टायरों का भी बड़ा रोल होता है. कम या अधिक एयर वाले टायरों को खराब हैंडलिंग और आसमान घिसाई हो सकती है. ऐसे में समय-समय पर अपनी बाइक के टायरों की जांच करते रहना जरूरी है. टायर प्रेशर पर एक्स्ट्रा ध्यान देना पड़ता है. कंपनी द्वारा दिए गए सभी पेपर इंस्ट्रक्शन के अनुसार ही उसपर काम करें.

बेटर क्वालिटी के टायर्स लगाएं 

आपको अपनी गाड़ी में हमेशा बेहतर क्वालिटी के टायर्स लगवाने चाहिए. अच्छी क्वालिटी वाली टायरों को गीली सड़कों मजबूत ग्रिप मिलती है और स्किड होने की संभावना नहीं रहती है. गीली सड़कों के लिए बढ़िया कंपनी में बनी टायरों का इस्तेमाल करें. इससे हैंडलिंग पर मजबूत पकड़ रहती है और ऐसा करने से गाड़ी को ड्राइव करना आसान हो जाता है.

यह भी पढ़ें: कार की बैटरी कब बदलनी चाहिए? इन 5 संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

यह भी पढ़ें: झमाझम बारिश में बीच रास्ते न रुक जाए आपकी कार, मॉनसून से पहले जरूर चेक करें ये चीजें


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shivansh Shekhar

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >