भारत के कई राज्यों में टेम्परेचर 47°C तक पहुंच गया है. ऐसी गर्मी में अगर आपकी कार ट्रैफिक में खड़े-खड़े ओवरहीट हो जाए, तो उसे सिर्फ बदकिस्मती मई समझिए. असल में यह संकेत है कि आपकी कार का कूलिंग सिस्टम पहले से ही लोड झेल रहा था. अगर अचानक टेम्परेचर का मीटर रेड जोन में पहुंच जाए, तो उसे इग्नोर करके गाड़ी चलाते रहना भारी पड़ सकता है. सिर्फ 5 मिनट तक ओवरहीट इंजन चलाने से हेड गैस्केट उड़ सकती है. फिर जो खर्च शुरू होगा, वो सीधे ₹30,000 से लेकर ₹1 लाख तक जा सकता है. इसलिए आइए जानते हैं टेम्परेचर बढ़ने के बाद शुरुआती कुछ मिनटों में आपको क्या करना चाहिए ताकि आप आराम से घर पहुंचे सके.
इंजन आखिर ओवरहीट क्यों हो रहा है?
- कम या पुराना कूलेंट: कार ओवरहीट होने की सबसे बड़ी वजह यही होती है. अगर कूलेंट 2 साल से ज्यादा पुराना हो गया है, तो वह इंजन की हीट सही तरीके से कम नहीं कर पाता. अगर कूलेंट कम है, तो इंजन की गर्मी बाहर निकालने के लिए सिस्टम के पास पर्याप्त फ्लूइड ही नहीं बचता.
- रेडिएटर जाम या गंदा होना: समय के साथ रेडिएटर में धूल, मिट्टी, कीड़े और सड़क की गंदगी जमा हो जाती है. ट्रैफिक में जब गाड़ी धीरे चलती है, तब हवा भी कम मिलती है और गंदा रेडिएटर इंजन को ठंडा नहीं कर पाता.
- कूलिंग फैन खराब होना: जब कार रुकी होती है या ट्रैफिक में फंसी होती है, तब सिर्फ फैन ही रेडिएटर तक हवा पहुंचाता है. अगर फैन काम नहीं कर रहा, तो इंजन जल्दी गर्म होने लगता है.
- थर्मोस्टेट फंस जाना: अगर थर्मोस्टेट बंद पोजिशन में अटक जाए, तो कूलेंट रेडिएटर तक पहुंच ही नहीं पाता. ऐसे में इंजन अंदर ही अंदर बहुत ज्यादा गर्म होने लगता है.
- कमजोर वॉटर पंप: शहर के ट्रैफिक में गाड़ी कम RPM पर चलती है. अगर वॉटर पंप पुराना या कमजोर हो गया है, तो वह कूलेंट को सही स्पीड से घुमा नहीं पाता और इंजन की गर्मी बढ़ने लगती है.
- पुराना इंजन ऑयल: समय पर ऑयल नहीं बदलने से उसका असर कम हो जाता है. फिर इंजन के अंदर ज्यादा घर्षण (Friction) होता है. इससे ज्यादा गर्मी पैदा होती है और कूलिंग सिस्टम पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है.
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जब टेम्परेचर का मीटर रेड जोन में चला जाए, तब क्या करें?
- AC बंद मत कीजिए, बल्कि उसे फुल हीट पर कर दीजिए: सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन इससे इंजन की गर्मी कम करने में मदद मिलती है. कार का हीटर अंदर से दूसरी रेडिएटर की तरह काम करता है और इंजन की गर्मी को बाहर निकालता है. खिड़कियां खोल दीजिए, इससे इंजन को थोड़ा राहत मिलेगी.
- तुरंत गाड़ी साइड में लगाइए: यह सोचकर चलते मत रहिए कि थोड़ी देर में टेम्परेचर खुद कम हो जाएगा. ओवरहीट इंजन को जितनी देर चलाएंगे, उतना ही हेड गैस्केट और इंजन को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ेगा.
- इंजन पूरी तरह बंद कर दीजिए: सिर्फ आइडल पर मत छोड़िए, गाड़ी पूरी तरह ऑफ कर दें.
- बोनट खोलिए, लेकिन सावधानी से: बोनट खोलते समय सीधे सामने खड़े मत होइए. साइड में रहकर खोलें, क्योंकि अंदर की फंसी हुई गर्म हवा तेजी से बाहर निकल सकती है.
- रेडिएटर कैप को हाथ मत लगाइए: गर्म इंजन में कूलेंट काफी प्रेशर में होता है और उसका टेम्परेचर 100 डिग्री से भी ज्यादा हो सकता है. ऐसे में कैप खोलने पर उबलता हुआ कूलेंट सीधे बाहर आ सकता है और गंभीर जलन हो सकती है. कम से कम 30 मिनट तक इंतजार करें.
- बाहर से कूलेंट रिजर्वायर चेक करें: ज्यादातर कारों में ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक का टैंक होता है जिस पर MIN और MAX का निशान बना रहता है. बिना खोले भी आप देख सकते हैं कि उसमें कूलेंट बचा है या नहीं.
- इंजन ठंडा होने के बाद ही कूलेंट डालें: सही कूलेंट को डिस्टिल्ड पानी के साथ मिलाकर डालें. नल के पानी में मिनरल्स होते हैं, जो धीरे-धीरे रेडिएटर में जम जाते हैं और बाद में दिक्कत और बढ़ा देते हैं.
- अगर तापमान अभी भी ज्यादा है, तो गाड़ी दोबारा स्टार्ट मत कीजिए: 30 मिनट बाद भी अगर मीटर हाई दिखा रहा है, तो मदद बुलाइए. उस हालत में गाड़ी चलाना पूरे इंजन को खराब कर सकता है.
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