हेलमेट में जमी गंदगी होगी छूमंतर, बदबूदार स्मेल की समस्या भी खत्म... अपनाएं ये सबसे आसान ट्रिक्स

क्या आपका हेलमेट भी बदबू और गंदगी से परेशान है? गंदा हेलमेट बालों के झड़ने और खुजली का कारण बन सकता है. जानें इसे साफ करने के आसान तरीके और पाएं फ्रेश राइड का अनुभव.

देश में रोजाना लोग अपने-अपने कामों को पूरा करने के लिए बाइक लेकर बाहर निकलते हैं. ऑफिस, कॉलेज से लेकर कई अन्य कामों के लिए मोटरसाइकिल राइड करनी पड़ती है. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने हेलमेट को पहन तो लेते हैं, लेकिन उसे कई महीनों तक साफ नहीं करते हैं. वैसे तो हेलमेट का इस्तेमाल सेफ्टी और धूल-मिट्टी से बचने के लिए करते हैं, मगर जब इसे आप लंबे समय तक क्लीन नहीं करते हैं, तब इसका असर आपके बालों पर होता है. इसमें जमी गंदगी बालों के अंदर तक जाती है, जिससे बाल झड़ने के साथ-साथ खुजली जैसी समस्याएं होती हैं. ऐसे में हेलमेट को 30 दिनों में कम-से-कम एक से दो बार साफ करें. आइए इसके लिए सबसे आसान ट्रिक्स बताते हैं.

हेलमेट नहीं धोने से होती हैं समस्याएं 

जैसा की हमने आपको ऊपर बताया था कि हेलमेट नहीं धोने से कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं. उसमें जमी हुई गंदगी आपके बालों के अंदरूनी हिस्सों में जाती है और फिर बाल झड़ने, खुजली होने और सर दर्द करने लगता है. बाइक की सर्विसिंग हम समय पर जरूर करवा लेते हैं, लेकिन थोड़े पैसे खर्च करके हेलमेट की सफाई करना भूल जाते है. यह भी हमारी डेली लाइफ का हिस्सा है, जिसे महीने में दो बार जरूर अपनाना चाहिए. 

हेलमेट को कब और कैसे धोएं?

बाजारों में दो तरह के हेलमेट उपलब्ध हैं, जिसमें एक धोने वाला यानि वॉशएबल भी शामिल है. इसे आसानी से आप धो सकते हैं. इसके इन साइड को ईजली बाहर निकाला जा सकता है. हेलमेट को क्लीन करने के लिए मार्केट में आपको लगभग 200 या उससे अधिक रुपये वाला क्लीनर मिल जाएगा. इससे हेलमेट को कम से कम 15 दिन में एक बार जरूर धोएं. ऐसे में 30 दिन यानि 1 महीने में दो बार इसकी धुलाई हो जाएगी. क्लीनर फोम को हेलमेट पर स्प्रे करें, उसके बाद एक साफ-सुथरा कपड़े से साफ कर दें. आपका हेलमेट चंद मिनटों में चकाचक हो जाएगा और उसमें से बदबूदार स्मेल भी नहीं आएगी.  

हेलमेट धोने का सबसे आसान ट्रिक

हेलमेट की सफाई करना कोई बड़ा और कठिन काम नहीं है. इसके लिए सबसे पहले आप अपना हेलमेट लें और उसके साथ गर्म पानी करके कोई बर्तन में रखें. गर्म पानी में थोड़ा विगेनर डाल दें. इसके अलावा दो स्पून कम्फर्ट (कपड़ा धोने वाला) और थोड़ा बेकिंग सोडा भी ऐड करें. पानी में सब मिलाने के बाद हेलमेट को अच्छी तरह वॉश करें. अब रही बात सुखाने की, तो एक छोटी साइज वाली बाल्टी लें और उसके ऊपर हेलमेट को रख दें. इस बात को माइंड में रखें कि हेलमेट पर सीधी धूप न पड़े. 

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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