भारत में ड्राइविंग हमेशा से थोड़ी अनप्रेडिक्टेबल रही है. ऑटोमेटेड ट्रैफिक सिस्टम, फर्जी एक्सीडेंट स्कैम और इंश्योरेंस से जुड़े विवाद बढ़ने के साथ ही डैशकैम की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा हो गई है. अब ये सिर्फ कार के शौकीनों या कंटेंट बनाने वालों का गैजेट नहीं रह गया है, बल्कि डेली ड्राइविंग में एक तरह की सेफ्टी लेयर बन गया है. चाहे कोई ट्रैफिक में झगड़ा हो, गलत चालान लग जाए या पार्किंग में गाड़ी को नुकसान पहुंच जाए, वीडियो सबूत होने पर मामला जल्दी और साफ तरीके से सुलझ जाता है.
डैशकैम कैसे काम करता है?
डैशकैम एक छोटा सा कैमरा होता है जिसे कार की विंडस्क्रीन या पीछे के शीशे पर लगाया जाता है. यह ड्राइविंग के दौरान लगातार सड़क की रिकॉर्डिंग करता रहता है, ताकि हर मूवमेंट का वीडियो सेफ रहे. ज्यादातर डैशकैम में लूप रिकॉर्डिंग फीचर होता है. यानी जब मेमोरी भर जाती है तो पुरानी वीडियो अपने आप डिलीट होकर नई रिकॉर्डिंग से रिप्लेस हो जाती है.
लेकिन अगर अचानक ब्रेक लग जाए, टक्कर हो जाए या तेज झटका लगे, तो इसका G-सेंसर एक्टिव हो जाता है और उस खास वीडियो को लॉक कर देता है, ताकि वो गलती से डिलीट न हो सके. आजकल के मॉडर्न डैशकैम में GPS ट्रैकिंग, मोबाइल ऐप कनेक्टिविटी, पार्किंग मॉनिटरिंग और रियर कैमरा जैसे एडवांस फीचर्स भी मिलते हैं.
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डैशकैम क्यों जरूरी है?
सड़क पर झगड़े के दौरान सेफ्टी
सड़क पर छोटी-मोटी टक्कर या लेन कटिंग जैसी घटनाएं अक्सर झगड़े में बदल जाती हैं. कई बार बिना सही सबूत के ही दोष दूसरे ड्राइवर पर डाल दिया जाता है. ऐसे समय में डैशकैम का वीडियो साफ-साफ दिखा देता है कि असल में हुआ क्या था. इससे बेवजह की बहस कम होती है और पुलिस रिपोर्टिंग भी काफी आसान जाती है.
गलत ई-चालान को चुनौती देना
भारत के कई शहरों में अब ऑटोमेटेड ट्रैफिक कैमरे तेजी से लगाए जा रहे हैं. लेकिन ये हमेशा 100% सही नहीं होते. कई बार स्पीड गलत रिकॉर्ड हो जाती है, नंबर प्लेट पहचान में गलती हो जाती है या फिर स्टॉप लाइन को लेकर भी एरर आ जाता है. ऐसे में GPS वाला डैशकैम काफी काम आता है. क्योंकि यह आपकी स्पीड, लोकेशन और सिग्नल की स्थिति का पूरा रिकॉर्ड रखता है. अगर कभी गलत e-challan कट जाए, तो यह फुटेज आपके लिए मजबूत सबूत बन सकता है.
पार्किंग में निगरानी और चोरी की कोशिशें
आजकल कई मॉडर्न डैशकैम में पार्किंग सर्विलांस मोड भी मिलता है. मतलब अगर आपकी गाड़ी पार्क है और कोई उसे टक्कर मार दे या चोरी की कोशिश करे, तो कैमरा खुद ही एक्टिव होकर आसपास की पूरी रिकॉर्डिंग शुरू कर देता है. ऐसे में हिट-एंड-रन या चोरी जैसी घटनाओं में आपके पास साफ सबूत होता है, जिससे नुकसान का पता लगाना आसान हो जाता है.
इंश्योरेंस दावों के दौरान सबूत
जब कोई एक्सीडेंट होता है, तो असली कहानी समझना कई बार मुश्किल हो जाता है. ऐसे में डैशकैम बहुत काम आता है. क्योंकि यह पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लेता है और साफ दिखाता है कि हादसा कैसे हुआ. खासकर इसलिए भी यह जरूरी है क्योंकि आजकल कुछ लोग जानबूझकर छोटी-मोटी टक्कर करके बाद में पैसे का झूठा दावा करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में डैशकैम की फुटेज सच सामने लाने में सबसे बड़ा सबूत बन जाती है.
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