रूई और समुद्र के पानी से बनेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, खत्म होगा चीन के दबदबा

हमारी प्रकृति में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के कई विकल्प भी मौजूद हैं. एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स के विशेषज्ञ सैम विल्किन्सन बताते हैं कि लिथियम का विकल्प खोजने वाले वैज्ञानिक रूई के अलावा समुद्र के पानी से भी बैटरी बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं.

नई दिल्ली : अगर आप किसी शोरूम से गाड़ी खरीदने जा रहे हैं और उसमें भी बैटरी से चलने वाली कार हो. उस समय यह कहा जाए कि आपकी गाड़ी रूई और पानी से चलेगी, तो आप चौंकेंगे कि नहीं? बिल्कुल सही बात है, आप बिना चौंके नहीं रह सकते. लेकिन, अब यह हकीकत बनने जा रहा है. जापान की एक कंपनी ने लिथियम के बजाय रूई वाली बैटरी बनाने की कवायद शुरू कर दी है. यह कंपनी रूई से बैटरी बनाने के लिए जापान की क्यूशू विश्वविद्यालय के सहयोग से रिसर्च कर रही है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उसकी यह कोशिश सफल हो सकती है. इतना ही नहीं, यह कंपनी रूई के अलावा समुद्र के पानी से भी बैटरी बनाने के प्रयास में जुटी हुई है. सबसे बड़ी बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में लगने वाली लिथयम बैटरियों के निर्माण पर चीन का दबदबा है. अगर जापान के वैज्ञानिक रूई, समुद्री पानी और सीवेज वेस्टेज से बैटरी बनाने में कामयाब हो जाते हैं, तो दुनिया को चीन के इस दबदबे से छुटकारा मिल जाएगा.

रूई से कैसे बनती है इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने वाली जापानी कंपनी पीजेपी आई के मुख्य खुफिया अधिकारी (सीआईओ) इंकेत्सू ओकिना ने इस बात का खुलासा किया है. पीजेपी आई के सीआईओ इंकेत्सु ओकिना ने बताया कि रूई से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने की प्रक्रिया काफी गुप्त है. उन्होंने बताया कि बैटरी के कार्बन को बनाने के लिए 3,000 डिग्री से ज्यादा तापमान की आवश्यकता होती है. इसके बाद करीब 1 किलो रूई से लगभग 200 ग्राम कार्बन निकलता है. उन्होंने कहा कि किसी भी बैटरी के सेल को चलाने के लिए केवल 2 ग्राम कार्बन की जरूरत होती है. आप बिना लीथियम का इस्तेमाल किए रूई से बहुत सारे बैटरी सेल का निर्माण कर सकते हैं.

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कैसे काम करता है आयन

उन्होंने कहा कि जब बैटरी चार्ज हो रही होती है, तो आयन एक दिशा में काम करता है. वहीं, जब बैटरी गाड़ियों के इंजन अपनी पावर सप्लाई करती है, तो आयन दूसरी दिशा में काम करना शुरू कर देता है. उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री से निकले घटिया किस्म के कपास का इस्तेमाल भी बैटरी बनाने के लिए किया जा सकता है.

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बैटरी बनाने के दूसरे विकल्प

इतना ही नहीं, हमारी प्रकृति में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के कई विकल्प भी मौजूद हैं. एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स के विशेषज्ञ सैम विल्किन्सन बताते हैं कि लिथियम का विकल्प खोजने वाले वैज्ञानिक रूई के अलावा समुद्र के पानी से भी बैटरी बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं. इसके अलावा, बायोवेस्ट और नेचुरल पिगमेंट से भी बैटरी बनाई जा सकती है. इतना ही नहीं, सीवेज वेस्टेज से भी बैटरी का निर्माण किया जा सकता है. फिनलैंड में स्टोरा एनसो ने पेड़ों में पाए जाने वाले पॉलिमर लिग्निन से निकले कार्बन से एक बैटरी एनोड विकसित की है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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