E20 (20% इथेनॉल मिले पेट्रोल) की वजह से गाड़ियों में आने वाली दिक्कतों के बारे में आपने भी कई लोगों को बात करते सुना होगा. लेकिन अब CNG कार चलाने वालों के लिए एक काम की जानकारी सामने आई है. दरअसल, एक Maruti Suzuki Victoris CNG के मालिक ने बताया है कि वह अपनी SUV में 167 रुपये प्रति लीटर वाला प्रीमियम E0 पेट्रोल ही क्यों भरवाते हैं. आइए जानते हैं इसकी वजह और क्या इससे आपकी CNG कार को भी फायदा हो सकता है.
कार मालिक ने बताया E20 पेट्रोल से जुड़ा जोखिम
इस वीडियो को Auto Chain India ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया है. वीडियो की शुरुआत में मालिक कहते हैं कि अगर आप CNG कार चलाते हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. वह बताते हैं कि ज्यादातर CNG कार मालिकों की तरह वह भी अपनी कार लगभग हमेशा CNG पर ही चलाते हैं.
ऐसे में कार की टंकी में भरा पेट्रोल कई बार हफ्तों या महीनों तक वैसे ही पड़ा रहता है. मालिक बताते हैं कि आजकल मिलने वाला E20 पेट्रोल अगर लंबे समय तक टंकी में पड़ा रहे, तो वह हवा से नमी (मॉइस्चर) खींचने लगता है. इसकी वजह से फ्यूल टैंक में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, इससे इंजन पर भी बुरा असर पड़ सकता है और आगे चलकर दूसरी तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं.
CNG कारों के लिए E0 पेट्रोल को बताया बेहतर ऑप्शन
वीडियो में आगे कार मालिक इन प्रॉब्लम्स का सलूशन देते हुए कहते हैं कि CNG गाड़ियों में E0 पेट्रोल का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. E0 पेट्रोल वह होता है, जिसमें एथेनॉल की मिलावट नहीं होती. उन्होंने बताया कि वह अपनी Maruti Suzuki Victors CNG में इंडियन ऑयल का XP100 पेट्रोल भरवाते हैं, जिसकी कीमत करीब 167 रुपये प्रति लीटर है.
उनके मुताबिक, चूंकि CNG गाड़ियां ज्यादातर समय CNG पर ही चलती हैं, इसलिए पेट्रोल टैंक में डाला गया नॉर्मल पेट्रोल लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं हो पाता. ऐसे में अगर टैंक में करीब 2,000 रुपये का E0 पेट्रोल भरवा दिया जाए, तो पेट्रोल और एथेनॉल के अलग होने (फेज सेपरेशन) की प्रॉब्लम नहीं होती. उनका कहना है कि सभी CNG गाड़ी मालिकों को जहां संभव हो, इंडियन ऑयल का XP100 या हिंदुस्तान पेट्रोलियम का poWer100 जैसे शुद्ध पेट्रोल का इस्तेमाल करना चाहिए.
फेज सेपरेशन क्या होता है?
आजकल मिलने वाले E20 पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिला होता है. एथेनॉल की खास बात यह है कि यह हवा में मौजूद नमी यानी पानी को आसानी से अपनी ओर खींच लेता है. जब E20 पेट्रोल लंबे समय तक बंद फ्यूल टैंक में पड़ा रहता है, तो पेट्रोल और एथेनॉल अलग-अलग होने लगते हैं. इस प्रोसेस को फेज सेपरेशन (Phase Separation) कहा जाता है.
इस दौरान पानी और एथेनॉल का मिक्सचर टैंक के सबसे नीचे जमा हो जाता है. चूंकि इंजन में सबसे पहले नीचे का ही फ्यूल पहुंचता है, इसलिए यह मिक्सचर फ्यूल टैंक, फ्यूल लाइन और फ्यूल पंप में जंग लगने का कारण बन सकता है. इतना ही नहीं, यह रबर गैस्केट और इंजन के दूसरे जरूरी पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
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