गर्मियों की तेज धूप में खड़ी कार का तापमान तेजी से बढ़ता है. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या काली कारें सफेद कारों की तुलना में ज्यादा गर्म होती हैं? रंग का असर कार की सतह और केबिन के तापमान पर पड़ता है, और यही वजह है कि यह चर्चा कार खरीदारों और मालिकों के लिए काफी अहम हो जाती है.
रंग और धूप का असर
काले रंग की सतह धूप से आने वाली अधिकतर किरणों को सोख लेती है और उन्हें गर्मी में बदल देती है. इसके विपरीत, सफेद रंग ज्यादा रोशनी को परावर्तित करता है, जिससे उसकी सतह अपेक्षाकृत ठंडी रहती है. यही कारण है कि धूप में खड़ी काली कार का बाहरी तापमान सफेद कार से कुछ डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाता है.
कार के अंदर का तापमान
कार केबिन का तापमान मुख्य रूप से “ग्रीनहाउस इफेक्ट” से बढ़ता है. धूप शीशों से अंदर जाती है और डैशबोर्ड और सीटों जैसी सतहों को गर्म करती है. यह गर्मी अंदर फंस जाती है और धीरे-धीरे पूरे केबिन का तापमान बढ़ा देती है. हालांकि, शोध बताते हैं कि काली कार का इंटीरियर सफेद कार की तुलना में कुछ डिग्री ज्यादा गर्म हो सकता है.
इंटीरियर और आराम पर असर
कार का अंदरूनी रंग और सामग्री भी तापमान पर बड़ा असर डालते हैं. गहरे रंग की सीटें और डैशबोर्ड ज्यादा गर्मी सोखते हैं, जबकि हल्के रंग का इंटीरियर अपेक्षाकृत ठंडा रहता है. इसके अलावा, टिंटेड ग्लास, सनशेड, वेंटिलेटेड सीटें और बेहतर एसी सिस्टम गर्मी कम करने में कारगर साबित होते हैं.
कुछ डिग्री का अंतर संभव
काली और सफेद कारों के बीच तापमान का अंतर कुछ डिग्री तक हो सकता है, लेकिन दोनों ही धूप में खड़ी रहने पर बेहद गर्म हो जाती हैं. ऐसे में असली फर्क कार के रंग से ज्यादा इस बात पर पड़ता है कि आप उसे कहां पार्क करते हैं और कौन-सी अतिरिक्त सुविधाएं इस्तेमाल करते हैं. छायादार जगह पर पार्किंग और रिफ्लेक्टिव विंडशील्ड कवर का इस्तेमाल रंग से कहीं ज्यादा असरदार साबित होता है.
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