भारत में जब भी मिडिल क्लास के सपनों और सफर की बात होती है, तो एक नाम जेहन में सबसे पहले आता है-Bajaj. यह सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों के लिए भरोसे का दूसरा नाम है. कभी "बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर" के साथ हर घर तक पहुंचने वाली यह कंपनी आज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 100 से ज्यादा देशों में अपनी धाक जमा चुकी है.
आखिर कैसे स्कूटर के लिए वर्षों की वेटिंग लिस्ट लगवाने वाली कंपनी ने रातों-रात स्कूटर बनाना बंद कर दिया? कैसे Pulsar ने युवाओं को स्पीड का नया चस्का लगाया? और कैसे यह ब्रांड आज इलेक्ट्रिक (EV) और CNG की क्रांति का नेतृत्व कर रहा है? आइए, Bajaj Auto के इस शानदार सफर को विस्तार से समझते हैं.
Bajaj Auto की कहानी सिर्फ बाइक की कहानी नहीं है
Bajaj की कहानी समझने में अक्सर एक गलती होती है. लोग Bajaj Group और Bajaj Auto को एक ही मान लेते हैं.
Bajaj Group की शुरुआत 1926 में Jamnalal Bajaj ने की थी. वहीं Bajaj Auto की मौजूदा कॉरपोरेट यात्रा की शुरुआत 29 नवंबर 1945 को Bachhraj Trading Corporation Private Limited के गठन से हुई. बाद में 1960 में इसका नाम Bajaj Auto Ltd. किया गया और उसी साल कंपनी सार्वजनिक हुई.
यानी 2026 में Bajaj Group अपनी शताब्दी मना रहा है, जबकि Bajaj Auto की ऑटोमोबाइल जर्नी भी करीब आठ दशक पूरी कर चुकी है. यहीं से शुरू होती है भारत की सबसे चर्चित दोपहिया कंपनियों में से एक की कहानी.
1940 के दशक में शुरू हुई कहानी
Bajaj Auto ने शुरुआती दौर में भारत में दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों के कारोबार पर ध्यान दिया. 1948 में कंपनी ने भारत में इंपोर्ट की हुई टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स की बिक्री शुरू की.
1959 में उसे देश में टू और थ्री-व्हीलर्स बनाने का लाइसेंस मिला. इसके अगले साल Akurdi में पहला प्लांट स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा और कंपनी ने Piaggio के लाइसेंस के तहत Vespa 150 का उत्पादन शुरू किया.
यह वह समय था जब भारत में निजी वाहन हर परिवार की पहुंच में नहीं थे. कार महंगी थी और सार्वजनिक परिवहन हर जगह उपलब्ध नहीं था. ऐसे में स्कूटर मिडिल क्लास फैमिली के लिए एक प्रैक्टिकल सॉल्यूशन बनकर उभरा. Bajaj ने इसी जरूरत को पहचाना. और फिर आया वह नाम जिसने कंपनी को घर-घर पहुंचा दिया.
Chetak: जब स्कूटर सिर्फ वाहन नहीं, परिवार का सदस्य बन गया
1972 में Bajaj ने Chetak को पेश किया. इसके बाद भारतीय सड़कों पर एक ऐसा दौर शुरू हुआ, जिसमें Chetak सिर्फ एक स्कूटर नहीं रहा. यह परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया. पिता इसी पर ऑफिस जाते थे, बच्चे स्कूल जाते थे और पूरा परिवार इसी पर बाजार तक पहुंचता था.
उस समय स्कूटर खरीदना सिर्फ मोबिलिटी का फैसला नहीं था. यह परिवार के लिए एक बड़ी खरीद होती थी. ऐसे में Chetak की मजबूती, उपयोगिता और भरोसे ने उसे अलग पहचान दी.
Bajaj के एडवरटाइजिंग कैंपेन “हमारा बजाज” ने इस इमेज को और मजबूत किया. धीरे-धीरे एक स्थिति ऐसी बनी कि कई लोगों के लिए स्कूटर का मतलब ही Bajaj हो गया. यही Bajaj Auto की पहली बड़ी ब्रांड सक्सेस थी. लेकिन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक समस्या है- जो आज लोकप्रिय है, जरूरी नहीं कि कल भी वही लोकप्रिय रहे. भारत में भी यही होने वाला था.
1990 के दशक में बदलने लगा बाजार, Bajaj के सामने बड़ी चुनौती
समय के साथ भारतीय ग्राहक की पसंद बदलने लगी. युवा आबादी बढ़ रही थी. मोटरसाइकिल को सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि स्टाइल और परफॉर्मेंस से जोड़कर देखा जाने लगा. दूसरी कंपनियां मोटरसाइकिल सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ रही थीं. Bajaj के लिए यह बड़ा सवाल था- क्या कंपनी हमेशा स्कूटर के भरोसे आगे बढ़ सकती है? जवाब था- नहीं.
यही वह दौर था जब Bajaj ने मोटरसाइकिल सेगमेंट को गंभीरता से लेना शुरू किया. कंपनी ने Kawasaki के साथ पार्टनरशिप की और मोटरसाइकिल पर अपना फोकस बढ़ाया. लेकिन Bajaj को ऐसी बाइक चाहिए थी जो सिर्फ एक और कम्यूटर मोटरसाइकिल न हो. उसे ऐसी बाइक चाहिए थी जो ब्रांड की पूरी पहचान बदल सके. और फिर आया साल 2001.
Pulsar: एक बाइक जिसने Bajaj की पूरी पहचान बदल दी
2001 में Pulsar लॉन्च हुई. उस समय भारतीय मोटरसाइकिल बाजार में बाइक्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से कम्यूटिंग के लिए होता था. Bajaj ने यहां एक अलग रास्ता चुना. Pulsar को परफॉर्मेंस, स्टाइलिंग और यूथफुल एटीट्यूड के साथ पोजिशन किया गया. मस्कुलर डिजाइन, बेहतर परफॉर्मेंस और अलग रोड प्रेजेंस ने इसे युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया. Pulsar की सफलता का असर सिर्फ सेल्स पर नहीं पड़ा. इसने Bajaj की इमेज बदल दी.
Chetak ने Bajaj को परिवारों का ब्रांड बनाया था, जबकि Pulsar ने उसे युवाओं का ब्रांड बना दिया. धीरे-धीरे Pulsar एक अकेला मॉडल नहीं रहा. अलग-अलग इंजन कैपेसिटी और प्राइस पॉइंट पर इसके कई मॉडल आए.
2026 में Pulsar ने अपने 25 साल पूरे किए. कंपनी के मुताबिक अब तक दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में 2 करोड़ से ज्यादा Pulsar मोटरसाइकिल बिक चुकी हैं. यानी 2001 में शुरू हुआ एक मोटरसाइकिल एक्सपेरिमेंट आज Bajaj की सबसे बड़ी ग्लोबल मोटरसाइकिल पहचान में से एक बन चुका है.
Bajaj ने सिर्फ Pulsar पर दांव नहीं लगाया
Pulsar की सफलता के बाद कंपनी ने समझ लिया था कि हर ग्राहक की जरूरत अलग है. इसलिए पोर्टफोलियो को भी अलग-अलग सेगमेंट में फैलाया गया. Platina और CT जैसे मॉडल्स को ज्यादा अफोर्डेबल कम्यूटर कस्टमर के लिए रखा गया.
Discover ने कम्यूटर सेगमेंट में अलग पहचान बनाने की कोशिश की. Avenger के जरिए Bajaj ने क्रूजर मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम मजबूत किया. वहीं Dominar के साथ कंपनी ने प्रीमियम और टूरिंग-फोकस्ड मोटरसाइकिल सेगमेंट को टार्गेट किया.
इसका मतलब साफ था- Bajaj सिर्फ एक मोटरसाइकिल कंपनी नहीं बनना चाहती थी; वह अलग-अलग प्राइस और कस्टमर सेगमेंट में अपनी जगह बनाना चाहती थी. लेकिन अगला बड़ा कदम भारत के बाहर था.
KTM ने Bajaj को प्रीमियम और ग्लोबल मोटरसाइकिल की दुनिया से जोड़ा
Bajaj और KTM की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप 2007 में शुरू हुई. यह पार्टनरशिप दोनों कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण थी. KTM को Bajaj के मैन्युफैक्चरिंग और इंडिया-बेस्ड कैपेबिलिटीज का फायदा मिला, जबकि Bajaj को प्रीमियम परफॉर्मेंस मोटरसाइकिल टेक्नोलॉजी और ग्लोबल ब्रांड इकोसिस्टम के साथ काम करने का अवसर मिला.
भारत में KTM मोटरसाइकिल के प्रोडक्शन ने Bajaj को प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट को और करीब से समझने का मौका दिया. धीरे-धीरे Bajaj का नाम सिर्फ मास-मार्केट मोटरसाइकिल के साथ नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस मोटरसाइकिल के साथ भी जुड़ने लगा.
Triumph के साथ आया एक और Premium Chapter
अगर KTM ने Bajaj को परफॉर्मेंस मोटरसाइकिल की दुनिया में मजबूत किया, तो Triumph ने प्रीमियम modern-classic सेगमेंट का रास्ता खोला.
Bajaj Auto और Triumph मोटरसाइकिल ने 2020 में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की थी. इसके तहत मिड-कैपेसिटी मोटरसाइकिल के लिए नई प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी पर काम किया गया.
भारत में Triumph के 400cc मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन Bajaj के चाकन प्लांट में होता है. FY2026 में KTM-Triumph बिजनेस ने करीब 2.25 लाख राइडर्स तक पहुंच बनाई और ग्लोबल रेवेन्यू लगभग ₹5,000 करोड़ रही.
इस पार्टनरशिप के तहत Speed 400, Scrambler 400 X और बाद में Thruxton 400 जैसे प्रोडक्ट्स ने भारतीय प्रीमियम मोटरसाइकिल मार्केट में Triumph की पहुंच बढ़ाई.
अब कहानी वापस आती है Chetak पर
यहां Bajaj की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा आता है. जिस Chetak ने कंपनी को कभी भारतीय परिवारों के बीच पहचान दी थी, वह समय के साथ बाजार से गायब हो गया. लेकिन Bajaj ने इस नाम को खत्म नहीं होने दिया. कंपनी ने पुराने ब्रांड को नई टेक्नोलॉजी के साथ वापस लाने का फैसला किया.
इस बार Chetak पेट्रोल नहीं, इलेक्ट्रिक था. 2019 में Chetak की इलेक्ट्रिक वापसी 2019 में Bajaj ने Chetak इलेक्ट्रिक को पेश किया. यह सिर्फ पुराने नाम को दोबारा इस्तेमाल करने की रणनीति नहीं थी. कंपनी ने हैरिटेज को नई मोबिलिटी टेक्नोलॉजी से जोड़ने की कोशिश की.
Bajaj सिर्फ बाइक और स्कूटर नहीं बनाती, तीन-पहिया कारोबार भी बड़ी ताकत
Bajaj Auto की कहानी में एक हिस्सा ऐसा है जिसकी चर्चा Pulsar और Chetak की तुलना में कम होती है- थ्री-व्हीलर. भारत में ऑटो-रिक्शा और कमर्शियल थ्री-व्हीलर की दुनिया में Bajaj की मजबूत पकड़ रही है.
कंपनी ने पैसेंजर कैरियर्स के साथ गुड्स कैरियर्स में भी बड़ा बिजनेस बनाया. FY2026 में Bajaj Auto का घरेलू थ्री-व्हीलर बिजनेस पहली बार 5 लाख यूनिट से ऊपर पहुंचा. यानी Bajaj का EV ट्रांजिशन सिर्फ Chetak तक सीमित नहीं है.
आज Bajaj Auto का कारोबार कितना बड़ा है?
FY2025-26 यानी FY2026 में Bajaj Auto ने कुल 51,17,667 व्हील्स बेचे. इसमें:
- 43,16,850 टू-व्हीलर्स
- 8,00,817 कमर्शियल व्हीकल्स
- 22,50,183 व्हीकल एक्सपोर्ट
कुल वॉल्यूम में सालाना आधार पर करीब 10% की बढ़ोतरी हुई और कंपनी ने पहली बार 50 लाख यूनिट्स का आंकड़ा पार किया. कंपनी की स्ट्रैटेजी का एक बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट भी है. लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया जैसे बाजारों में Bajaj Motorcycle और थ्री-व्हीलर्स की मौजूदगी है. इसका मतलब है कि Bajaj की ग्रोथ सिर्फ भारत की सड़कों पर निर्भर नहीं है.
