3 साल में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के 2784 मामले देशभर में हुए दर्ज, जानिए कितना संगीन है यह

Cyber Crime Against Children - राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2019 में 306, 2020 में 1102 और 2021 के दौरान बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के 1376 मामले दर्ज किये गए.

Cyber Crime Against Children : देश में 2019 से 2021 के दौरान बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के 2,784 मामले दर्ज किये गए हैं. सरकार द्वारा हाल ही में लोकसभा में पेश आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. लोकसभा में हसनैन मसूदी के प्रश्न के लिखित उत्तर में इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी. वैष्णव ने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य अपने सभी उपयोगकर्ताओं के लिए एक खुला, सुरक्षित और विश्वसनीय एवं जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है.

च्चों सहित सभी लोगों के खिलाफ साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं

इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इंटरनेट का विस्तार और अधिक से अधिक भारतीयों के लिए ऑनलाइन आने के साथ बच्चों सहित सभी लोगों के खिलाफ साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2019, 2020 और 2021 के दौरान बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के क्रमश: 306, 1102 और 1376 मामले दर्ज किये गए हैं. इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और उसके तहत बनाये गए नियमों में साइबर क्षेत्र को बच्चों के लिए सुरक्षित और जवाबदेह बनाने का प्रावधान शामिल है.

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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 बी में क्या हैं प्रावधान?

वैष्णव ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 बी में बच्चों को अश्लील कृत्यों में चित्रित करने वाली इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण, पाठ या चित्र तैयार करने, डाउनलोड करने, विज्ञापन, प्रचार या बच्चों को अपमानजनक रूप में पेश करने, बच्चों के साथ यौन कार्य संबंधी दुरुपयोग को इलेक्ट्रॉनिक रूप से रिकाॅर्ड करने पर जुर्माने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि इसके तहत अपराध में पहली बार दोषी पाये जाने पर पांच साल तक की कैद और बाद में दोषी पाये जाने पर सात साल तक की कैद और दस लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है तथा यह एक संज्ञेय अपराध है.

भारत में बच्चों से जुड़े साइबर अपराध की खास बातें

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों के मामले एक गंभीर समस्या हैं. इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों के विकास के साथ, बच्चों का इंटरनेट पर ट्रैफिक बढ़ गया है, जिससे उन्हें साइबर अपराधों के संपर्क में आने का खतरा हुआ है. कुछ आम साइबर अपराध निम्नलिखित हो सकते हैं –

सोशल मीडिया में बुलींग (साइबर बुलींग) : इंटरनेट पर बच्चों को सोशल मीडिया प्लैटफॉर्मों पर बुलाया जा सकता है, जिससे उन्हें निराशा और भय का सामना करना पड़ सकता है.

ऑनलाइन गेमिंग अभियांत्रिकी (ऑनलाइन गेमिंग हैकिंग) : ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े खिलाड़ियों को धोखे से उत्पन्न किया जा सकता है और उनके खाते हैक किये जा सकते हैं.

वेबसाइट्स पर असामाजिक विषयों का उपयोग : बच्चों को वेबसाइट्स पर असामाजिक विषयों और निर्दयता के प्रचार-प्रसार के शिकार बनाया जा सकता है.

ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री : बच्चों को ईमेल, चैट, फोरम्स और अन्य ऑनलाइन संपर्कों के माध्यम से अपराधियों द्वारा आपत्तिजनक सामग्री भेजी जा सकती है.

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भारत में सरकार ने ऐसे साइबर अपराधों के खिलाफ कई कदम उठाये हैं और साइबर सुरक्षा में सुधार के लिए नियम और अधिनियम भी बनाये गए हैं. इसके अलावा, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित संस्थानों ने बच्चों को साइबर सुरक्षा के महत्व को समझाने के लिए जागरूकता अभियांत्रिकी आयोजित की हैं.

बच्चों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक और सचेत रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और उन्हें इंटरनेट पर अपनी गतिविधियों को संयंत्रित रखना चाहिए. बच्चों के इंटरनेट उपयोग को निगरानी में रखने वाले अभिभावकों और शिक्षकों का भी यह जिम्मेदारी है कि वे उन्हें साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक बनाएं और सहायता करें.

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Author: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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