मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट.
BNMU Controversy: क्या भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में सब कुछ ठीक चल रहा है? विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं, कर्मचारियों की समस्याओं और छात्र-शिक्षक मामलों को लेकर उठी शिकायतों ने अब राजभवन का ध्यान खींच लिया है. राज्यपाल सचिवालय ने बीएनएमयू प्रशासन से कई गंभीर आरोपों पर 15 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है.
बढ़ी विश्वविद्यालय की मुश्किलें
भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) से जुड़े विभिन्न मामलों में प्राप्त शिकायतों के बाद राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्टीकरण तलब किया है. इस संबंध में कुलपति को पत्र भेजकर निर्धारित समय सीमा के भीतर बिंदुवार प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
जानकारी के अनुसार राज्यपाल सचिवालय, पटना की ओर से जारी पत्र में विश्वविद्यालय के कई प्रशासनिक और वित्तीय मामलों पर जवाब मांगा गया है. इससे विश्वविद्यालय के अंदर चल रही गतिविधियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं.
UMIS और CIMS को लेकर उठे सवाल
राज्यपाल के अपर सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (यूएमआईएस) और कॉलेज इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईएमएस) के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों का विशेष उल्लेख किया गया है.
शिकायतों में इन परियोजनाओं के संचालन में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावा विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मियों की सेवा संबंधी समस्याओं और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं.
गिरीराज सिंह से लेकर पप्पू यादव तक की शिकायतों का हवाला
राज्यपाल सचिवालय द्वारा भेजे गए पत्र में केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh, सांसद Rajesh Ranjan तथा विधान परिषद सदस्य Dr. Sanjeev Kumar Singh द्वारा भेजे गए शिकायत पत्रों का संदर्भ दिया गया है.
इन शिकायतों में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली, मानक प्रावधानों से कथित विचलन और कुछ छात्र-शिक्षक संगठनों के साथ कथित अन्यायपूर्ण व्यवहार जैसे मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं.
15 दिनों में देना होगा साक्ष्यों के साथ जवाब
राज्यपाल सचिवालय ने कुलपति को निर्देश दिया है कि सभी आरोपों और शिकायतों पर विश्वविद्यालय का स्पष्ट पक्ष उपलब्ध कराया जाए. साथ ही संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों के साथ विस्तृत बिंदुवार प्रतिवेदन 15 दिनों के भीतर भेजा जाए.
बताया गया है कि यह पत्र 5 जून 2026 को जारी किया गया है. अब विश्वविद्यालय प्रशासन के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों में उठाए गए मुद्दों पर विश्वविद्यालय क्या सफाई देता है और आगे क्या कार्रवाई होती है.
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