बाराहाट (बाका) से अजय कुमार झा की रिपोर्ट:
एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर ‘हर घर नल का जल’ योजना को ग्रामीणों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं बाराहाट प्रखंड के खड़हरा गांव में हालात इतने बदतर हैं कि लोगों के घरों तक नल का साफ पानी नहीं, बल्कि नाले का गंदा पानी पहुंच रहा है. यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं की पोल खोल रही है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है.दर्जनों परिवार हो रहे परेशान
गांव के वार्ड संख्या 11 और 12 की सीमा पर रहने वाले दर्जनों परिवार वर्षों से जलजमाव की गंभीर समस्या झेल रहे हैं. भीषण गर्मी में जहां लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन परिवारों के घरों की पहली मंजिल तक एक से दो फीट गंदा पानी जमा है. घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। गंदे पानी के कारण जहरीले सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतु घरों में घुस रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर लगातार खतरा मंडरा रहा है.
ग्रामीण प्रियेश मिश्रा, त्रिपुरारि शरण, कुंदन कुमार झा और गौरव मिश्रा ने आरोप लगाया कि गांव में नाला निर्माण के दौरान भारी अनियमितता बरती गई. नाले की ढलान और बहाव की दिशा तकनीकी मानकों के विपरीत बना दी गई, जिसके कारण गंदा पानी निकलने के बजाय वापस घरों और गलियों में जमा हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में हुई गंभीर लापरवाही का परिणाम है.समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और मुखिया को शिकायत दी गई, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई. नतीजतन दर्जनों परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं.सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर समस्या के बावजूद प्रशासन को इसकी जानकारी तक नहीं है. प्रखंड विकास पदाधिकारी गोपाल कुमार गुप्ता ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है.उन्होंने जांच के बाद समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे. अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता देता है या फिर खड़हरा के लोग यूं ही गंदे पानी में जीवन गुजारने को मजबूर रहेंगे.