सऊदी अरब पर फिर हूतियों का हमला, शरूराह बेस के हथियार डिपो को बनाया निशाना

Houthi Attack on Saudi Arab : यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाया. शरूराह क्षेत्र में सैन्य बेस के हथियार डिपो पर हमला किया गया, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में अलर्ट जारी करना पड़ा. मिडिल ईस्ट में मानवीय संकट भी गहरा रहा है.

Houthi Attack on Saudi Arab : पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' और अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों की नई खेप दागी. हमलों के बाद सीमा से सटे खमीस मुशायत और आभा क्षेत्रों में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके चलते सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग को एक घंटे के भीतर दो बार आपातकालीन अलर्ट जारी करना पड़ा.

सैन्य ठिकानों और लाल सागर के जहाजों पर निशाना

हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी के अनुसार, संगठन ने सऊदी अरब के शरूराह क्षेत्र में स्थित एक सैन्य बेस पर हथियारों के डिपो और कमांड-कंट्रोल रूम को निशाना बनाया है. सीमाई इलाके में हुए इस हमले में दो लोगों के घायल होने की खबर है.

इससे पहले जुलाई में रियाद के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी का ऐलान करने के बाद से हूती विद्रोही लाल सागर और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरने वाले सऊदी तेल टैंकरों और जहाजों को लगातार निशाना बना रहे हैं.

यमन में स्वास्थ्य ढांचा चरमराया, अस्पताल खाली

लगातार जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण यमन के पश्चिमी तट पर मानवीय संकट गहरा गया है. 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' के अनुसार, इलाके के अस्पतालों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है. वीकेंड के दौरान सुरक्षा कारणों से सभी अस्पतालों को खाली कराना पड़ा था.

हालांकि मोचा जनरल अस्पताल समेत कुछ स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी सेवाएं आंशिक रूप से बहाल की गई हैं, लेकिन चिकित्सा कर्मियों और दवाओं की भारी कमी के कारण आम नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के इलाज में बाधा आ रही है.

ब्रिक्स घोषणापत्र में शांति की अपील, अमेरिकी मदद से इनकार की चर्चा

सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई का आग्रह किया था, जिसे अमेरिका ने स्वीकार नहीं किया. यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब शनिवार को जारी नई दिल्ली ब्रिक्स घोषणापत्र में सऊदी अरब, ईरान और यूएई समेत सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में तनाव पर गहरी चिंता जताई थी. ब्रिक्स देशों ने संयम बरतने, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और वैश्विक ऊर्जा व व्यापार आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए कूटनीतिक बातचीत पर जोर दिया था.

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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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